नैनीताल का बिरला विद्या मंदिर: द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व
सारांश
Key Takeaways
- नैनीताल का बिरला विद्या मंदिर, द्वितीय विश्व युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- यह विद्यालय जिम कॉर्बेट और अन्य महान हस्तियों से जुड़ा है।
- ब्रिटिश सेना के सैनिकों के बच्चों की शिक्षा का केंद्र रहा है।
- प्रतिवर्ष स्मृति प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं।
- विद्यालय के छात्र सफल करियर बना रहे हैं।
नैनीताल, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड की अद्भुत वादियों में स्थित नैनीताल अपनी आकर्षक झील और सुंदरता के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इस शहर में अनेक ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो अंतरराष्ट्रीय इतिहास से जुड़ी हुई हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण विद्यालय है, बिरला विद्या मंदिर, जो द्वितीय विश्व युद्ध से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह है।
इस विद्यालय का इतिहास जिम कॉर्बेट, जो कि एक प्रसिद्ध शिकारी और प्रकृतिविद् थे, से भी जुड़ा हुआ है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा के अनुसार, इस संस्थान की औपचारिक शुरुआत जुलाई 1947 में हुई, जबकि इसकी भूमि 1946 में खरीदी गई थी। इसके पूर्व यह 1877 में स्थापित ओक ओपनिंग स्कूल के साथ जुड़ा था। समय के साथ, यह परिसर कई संस्थानों का केंद्र बना और बाद में प्रसिद्ध फिलेंडर स्मिथ स्कूल को मसूरी से यहाँ स्थानांतरित किया गया।
अनिल शर्मा ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, इस विद्यालय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। उस समय, ब्रिटिश सेना में तैनात सैनिकों के बच्चों की शिक्षा यहीं होती थी। 1942 से 1946 के बीच इसे हैलेट वार स्कूल के नाम से जाना जाता था, जो उस समय की परिस्थितियों को दर्शाता है।
यह संस्थान अनेक महान हस्तियों से भी जुड़ा रहा है। जिम कॉर्बेट ने यहीं से शिक्षा प्राप्त की थी और उनका बंगला नैनीताल की आयारपाटा पहाड़ी पर स्थित है, जिसे गर्नी हाउस कहा जाता है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बीर बहादुर सिंह भी इसी विद्यालय के छात्र रहे हैं, और पंडित गोविन्द बल्लभ पंत का भी इस विद्यालय की स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
प्रधानाचार्य अनिल शर्मा के अनुसार, विद्यालय में हर वर्ष जिम कॉर्बेट और पंडित गोविन्द बल्लभ पंत की स्मृति में ‘एनुअल यंग आइडियल कंपटीशन’ आयोजित किया जाता है, जो पिछले 9 वर्षों से निरंतर चल रहा है। आज नैनीताल की पहचान केवल पर्यटन और खूबसूरत दृश्यों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक व्यापक इतिहास का भी प्रतीक है। यहाँ आज भी कई ऐसी इमारतें और चीजें हैं जो इस शहर को विशेष बनाती हैं। प्रधानाचार्य ने कहा कि इस स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे बहुत अच्छे करियर बना रहे हैं।