दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब की दुकानों के वित्तीय ऑडिट का निर्णय लिया
सारांश
Key Takeaways
- ऑडिट का आदेश वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है।
- मुख्यमंत्री ने लापरवाही को सहन नहीं करने की चेतावनी दी।
- सभी सरकारी संस्थाओं को मिलान करने का निर्देश दिया गया है।
- आबकारी आयुक्त क्रॉस-चेकिंग करेंगे।
- सरकारी राजस्व की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले पांच वर्षों में शराब की खुदरा बिक्री में संलग्न सरकारी संस्थाओं के वित्तीय रिकॉर्ड की संपूर्ण ऑडिट और क्रॉस-वेरिफिकेशन का आदेश दिया है। यह कदम संभावित अनियमितताओं को लेकर उठाया गया है, जिससे चिंताओं को दूर किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लापरवाही, वित्तीय कुप्रबंधन या बेमेल खातों को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। हाल के निष्कर्षों ने यह दर्शाया है कि कुछ उपक्रमों में खातों का समय पर मिलान नहीं किया गया, जिसके चलते विसंगतियों और सरकारी खजाने को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री का कार्य वर्तमान में दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक भंडार (डीसीसीडब्ल्यूएस), दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी), दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (डीएससीएससी) और दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) जैसी सरकारी संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड सुधारना नहीं, बल्कि वित्तीय निगरानी की एक मजबूत प्रणाली स्थापित करना है। इसमें सख्त निगरानी, मिलान और खातों का सम्पूर्ण सत्यापन एवं प्रमाणीकरण शामिल है।
उन्होंने सभी संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे पिछले पांच वर्षों के अपने वित्तीय और परिचालन रिकॉर्ड का विस्तृत मिलान करें।
इस प्रक्रिया में बिक्री, खरीद, स्टॉक और नकद रिकॉर्ड को शामिल किया जाएगा और इसकी गहन जांच की जाएगी। इन एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे रिकॉर्ड के पूर्ण सत्यापन के लिए आबकारी विभाग के साथ समन्वय करें।
जवाबदेही को बढ़ाने के लिए, आबकारी आयुक्त बिक्री, इन्वेंट्री और राजस्व से जुड़े डेटा की स्वतंत्र रूप से क्रॉस-चेकिंग करेंगे, ताकि किसी भी वित्तीय कुप्रबंधन या अनियमितताओं का पता लगाया जा सके।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान या विसंगतियों के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के पैसे की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और किसी भी चूक के प्रति हमारी नीति 'जीरो टॉलरेंस' होगी।
सभी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरी प्रक्रिया की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें और इसे दो महीने के भीतर वित्त विभाग को प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन उपायों से न केवल वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व संग्रह की प्रक्रिया भी अधिक कुशल और उत्तरदायी बनेगी।