दिल्ली में बेहतर हवा और जीवन के लिए नई पहल: मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का बयान
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण के खिलाफ नई तकनीकों के परीक्षण का निर्णय लिया है।
- 22 तकनीकों का चयन किया गया है, जो प्रदूषण को कम करने में सहायक होंगी।
- सभी विभागों को सहयोग करने की निर्देशित किया गया है।
- परीक्षण का डेटा वैज्ञानिक तरीकों से इकट्ठा किया जाएगा।
- दिल्ली की जनता को बेहतर हवा और जीवन प्रदान करने का लक्ष्य है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार अब वायु प्रदूषण के खिलाफ अपनी लड़ाई को और अधिक तेज कर रही है। इसी संदर्भ में सोमवार को पर्यावरण एवं वन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी), नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी), नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस), दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीटीआईडीसी) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य 22 नई और प्रभावी तकनीकों के परीक्षण की गति को बढ़ाना था, जिन्हें देशभर से आई 284 प्रविष्टियों में से चुना गया है।
मंत्री सिरसा ने सभी विभागों से अनुरोध किया कि वे इन परीक्षणों के लिए समुचित सहायता प्रदान करें—जैसे कि स्थान की अनुमति, उपकरणों की स्थापना की अनुमति, बिजली की व्यवस्था और एनओसी जारी करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइट की अनुमति, वाहनों की व्यवस्था और बिजली कनेक्शन में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। इन परीक्षणों का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है ताकि दिल्ली को साफ हवा के लिए प्रभावी और कार्यशील समाधान मिल सकें।
दिल्ली सरकार द्वारा आरंभ किया गया यह इनोवेशन चैलेंज कम लागत और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले ऐसे समाधान खोजने पर केंद्रित है, जो पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषकों को कम कर सकें—चाहे वह वाहनों से निकलने वाला धुआं हो या वातावरण में मौजूद धूल।
शुरुआत में 284 प्रविष्टियाँ आई थीं, जिनमें से 48 को डीपीसीसी द्वारा चयनित किया गया और आगे स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन समिति (आईटीईसी) को भेजा गया। आईआईटी दिल्ली, सीपीसीबी, एआरएआई (पुणे), एनपीएल, डीटीयू और मारुति सुजूकी के विशेषज्ञों वाली इस समिति ने जांच के बाद 22 नवाचारों को परीक्षण के लिए चुना।
इन परीक्षणों की निगरानी आईआईटी दिल्ली, नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (एनपीएल) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी) द्वारा की जाएगी, जिससे डेटा पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा किया जा सके। मई के अंत तक डेटा इकट्ठा किया जाएगा, मई-जून में उसका मूल्यांकन होगा और जुलाई 2026 तक सरकार को अंतिम सिफारिशें प्रस्तुत की जाएँगी।
मंत्री सिरसा ने नवप्रवर्तकों के प्रयासों की सराहना की और आईटीईसी तथा डीपीसीसी की टीम की मेहनत को भी सराहा। बैठक में परीक्षण के बाद की योजना पर भी चर्चा की गई, जिसमें सफल तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने और सरकारी स्तर पर अपनाने की रणनीति शामिल है।
अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री ने कहा, “दिल्ली की जनता को बेहतर हवा और बेहतर जीवन देना हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि यह पूरे शहर का सामूहिक प्रयास है, जिसमें हर विभाग, वैज्ञानिक और नवप्रवर्तक की महत्वपूर्ण भूमिका है।