दिल्ली में उपराज्यपाल वीके सक्सेना की बेइज्जती पर सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली में उपराज्यपाल की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
- सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल की बेइज्जती का आरोप लगाया है।
- भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
- यह मामला दिल्ली की राजनीति में नया विवाद पैदा कर रहा है।
- उपराज्यपाल पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने के आरोप लगे हैं।
नई दिल्ली, १० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर उपराज्यपाल वीके सक्सेना को लेकर सियासी बयानबाजी तेजी से बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को सरकार के एक विज्ञापन में चौथे नंबर पर रखकर उनकी सार्वजनिक रूप से बेइज्जती की गई है। मंगलवार को विभिन्न राष्ट्रीय और स्थानीय अखबारों में केंद्र सरकार की ओर से एक पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ।
इस विज्ञापन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस व्यक्ति को केंद्र सरकार कभी दिल्ली का अभिभावक मानती थी, आज उसी को विज्ञापन में चौथे स्थान पर खिसका दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह वही उपराज्यपाल वीके सक्सेना हैं, जिन्होंने अरविंद केजरीवाल सरकार के समय कई बार सरकारी बोर्डों पर अपना नाम मुख्यमंत्री से ऊपर लिखवाया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मंगलवार को प्रकाशित विज्ञापन में सबसे ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम है। दूसरे स्थान पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम है। तीसरे नंबर पर केंद्र सरकार के राज्य मंत्रियों के नाम हैं, जबकि चौथे स्थान पर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का नाम रखा गया है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर एलजी को भाजपा दिल्ली का अभिभावक मानती है, तो उन्हें इस तरह चौथे स्थान पर क्यों रखा गया? उन्होंने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भाजपा के इशारे पर दिल्ली सरकार के खिलाफ कई झूठे मुकदमे दर्ज कराए, जिनमें कथित शराब नीति घोटाले का मामला भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि उस समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इन मामलों में कड़ी कार्रवाई होगी और कई नेताओं को सजा मिलेगी, लेकिन अदालत में इन मामलों की सुनवाई के दौरान सीबीआई की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अदालत में जिस तरह से इन मामलों में केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं, उससे उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
उनका मानना है कि इन मामलों में हुई किरकिरी की जिम्मेदारी अब उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर डाली जा रही है, इसलिए उन्हें सार्वजनिक रूप से इस तरह पीछे किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली की राजनीति में फिर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी इसे एलजी की बेइज्जती मान रही है, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।