26 जून 2026
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दिल्ली पुलिस ने CCTNS प्रगति डैशबोर्ड पर लगातार छठी बार हासिल किया 100% स्कोर, देशभर में नंबर-वन

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दिल्ली पुलिस ने CCTNS प्रगति डैशबोर्ड पर लगातार छठी बार हासिल किया 100% स्कोर, देशभर में नंबर-वन

सारांश

दिल्ली पुलिस ने CCTNS प्रगति डैशबोर्ड पर लगातार छठी बार 100% स्कोर हासिल कर देशभर में पहला स्थान अपने नाम किया है। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक की यह अटूट श्रृंखला डिजिटल पुलिसिंग में दिल्ली के संस्थागत ढाँचे की मज़बूती को दर्शाती है — और यह संकेत देती है कि तकनीक-आधारित सुधार अब रुटीन बन चुके हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने मार्च 2026 में सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड पर 100% स्कोर के साथ लगातार छठी बार राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।
यह उपलब्धि अक्टूबर 2025 से शुरू हुई और मार्च 2026 तक अटूट रही।
डैशबोर्ड की निगरानी गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) करते हैं।
सफलता में डीसीपी आदित्य गौतम , एसीपी मुकेश राठी और इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव की रणनीतिक भूमिका रही।
पुलिस आयुक्त सतीश गोल्छा ने टीम को बधाई देते हुए उच्च मानकों को जारी रखने का आह्वान किया।

दिल्ली पुलिस ने मार्च 2026 में सीसीटीएनएस (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणालियां) प्रगति डैशबोर्ड पर 100 प्रतिशत अंक हासिल कर देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह लगातार छठी बार है जब दिल्ली पुलिस ने यह शीर्ष स्थान अपने नाम किया है, जो डिजिटल पुलिसिंग और डेटा प्रबंधन में उसकी निरंतर उत्कृष्टता को रेखांकित करता है।

लगातार छह माह की असाधारण उपलब्धि

दिल्ली पुलिस ने सबसे पहले अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2025 में लगातार तीन महीने 100 प्रतिशत स्कोर हासिल किया था। इसके बाद जनवरी और फरवरी 2026 में भी शीर्ष स्थान बरकरार रखा गया। अब मार्च 2026 में भी टॉप पोजिशन बनाए रखकर दिल्ली पुलिस ने यह सिद्ध किया है कि उसकी डिजिटल क्षमता किसी एकबारगी प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि ठोस प्रणालीगत ढाँचे पर टिकी है।

किन मानकों पर होता है मूल्यांकन

गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा मॉनिटर किया जाने वाला प्रगति डैशबोर्ड राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन कई अहम मानकों पर करता है। इनमें पुलिस स्टेशनों की कनेक्टिविटी, डिजास्टर रिकवरी सेंटर की स्थापना, डेटा एंट्री की गुणवत्ता, पुराने डेटा का माइग्रेशन, स्टेट डेटा सेंटर और नेशनल डेटा सेंटर के बीच डेटा सिंक्रोनाइजेशन, कोर्ट में एफआईआर की इलेक्ट्रॉनिक सबमिशन, नागरिक सेवाएं और आईसीजेएस (अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली) की नियमित समीक्षा बैठकें शामिल हैं।

सफलता के पीछे की रणनीति

इस उपलब्धि की नींव 'नवीन न्याय संहिता' के प्रभावी क्रियान्वयन और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म के बेहतर उपयोग पर टिकी है। क्राइम ब्रांच की सीसीटीएनएस टीम ने डेटा की गुणवत्ता पर लगातार नज़र रखी, जिलों और थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय किया, तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान निकाला और अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण दिया। सभी जिलों के पुलिसकर्मियों ने तय समयसीमा का पालन करते हुए जाँच से जुड़े रिकॉर्ड समय पर अपडेट किए और डेटा का डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया।

प्रमुख अधिकारियों की भूमिका

इस सफलता में डीसीपी/सीसीटीएनएस आदित्य गौतम, एसीपी/सीसीटीएनएस मुकेश राठी और इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने रणनीतिक मार्गदर्शन और बेहतर समन्वय के ज़रिए पूरी टीम को एकजुट रखा। दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोल्छा ने सभी जिलों, यूनिट्स और सीसीटीएनएस टीम को बधाई देते हुए उनकी मेहनत, प्रोफेशनलिज्म और टीमवर्क की सराहना की।

आगे की राह

गोल्छा ने स्पष्ट किया कि इसी तरह के उच्च मानकों को बनाए रखना ज़रूरी है, ताकि तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को और मज़बूत किया जा सके। दिल्ली पुलिस ने भरोसा जताया है कि वह भविष्य में भी आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं के ज़रिए नागरिकों को सुरक्षित और बेहतर सेवाएं देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि डेटा एंट्री की गुणवत्ता और वास्तविक अपराध नियंत्रण के बीच की खाई को यह डैशबोर्ड कितना मापता है। ई-गवर्नेंस मेट्रिक्स में शीर्ष स्थान और ज़मीनी सुरक्षा की अनुभूति दो अलग-अलग पैमाने हैं। फिर भी, डेटा डिजिटलीकरण और ICJS एकीकरण में यह निरंतरता भारत के आपराधिक न्याय तंत्र को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है — बशर्ते इसे जवाबदेही के व्यापक ढाँचे से जोड़ा जाए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CCTNS प्रगति डैशबोर्ड क्या है और इसे कौन मॉनिटर करता है?
CCTNS प्रगति डैशबोर्ड एक राष्ट्रीय मूल्यांकन मंच है जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की डिजिटल पुलिसिंग क्षमता को मापता है। इसकी निगरानी गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) करते हैं और इसमें डेटा गुणवत्ता, कनेक्टिविटी, FIR की इलेक्ट्रॉनिक सबमिशन जैसे मानक शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने CCTNS डैशबोर्ड पर कितनी बार पहला स्थान हासिल किया है?
दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक लगातार छह बार 100% स्कोर के साथ CCTNS प्रगति डैशबोर्ड पर पहला स्थान हासिल किया है। यह देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सर्वोच्च प्रदर्शन है।
इस उपलब्धि में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
डीसीपी/सीसीटीएनएस आदित्य गौतम, एसीपी/सीसीटीएनएस मुकेश राठी और इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव ने रणनीतिक मार्गदर्शन और समन्वय के ज़रिए इस सफलता को संभव बनाया। क्राइम ब्रांच की सीसीटीएनएस टीम और सभी जिलों के पुलिसकर्मियों का भी अहम योगदान रहा।
CCTNS और ICJS में क्या अंतर है?
CCTNS (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणालियां) पुलिस स्तर पर अपराध डेटा को डिजिटल रूप से दर्ज और साझा करने की प्रणाली है, जबकि ICJS (अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली) पुलिस, अदालतों, जेलों और अभियोजन को एक साझा मंच पर जोड़ती है। दोनों मिलकर भारत के आपराधिक न्याय तंत्र को डिजिटल बनाते हैं।
दिल्ली पुलिस की यह रैंकिंग आम नागरिकों के लिए क्यों मायने रखती है?
यह रैंकिंग दर्शाती है कि FIR दर्ज होने से लेकर अदालत तक की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और डिजिटल हो रही है। नागरिक सेवाओं में सुधार, डेटा की सटीकता और त्वरित न्याय प्रक्रिया — ये सब CCTNS के बेहतर क्रियान्वयन के प्रत्यक्ष लाभ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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