क्या दिल्ली के साकेत कोर्ट के स्टाफ मेंबर ने काम के दबाव के कारण आत्महत्या की?

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क्या दिल्ली के साकेत कोर्ट के स्टाफ मेंबर ने काम के दबाव के कारण आत्महत्या की?

सारांश

दिल्ली के साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के स्टाफ मेंबर की आत्महत्या ने काम के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता को उजागर किया है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या कार्यस्थल पर तनाव को कम करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • काम का दबाव: कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए।
  • सहायता की आवश्यकता: विकलांग व्यक्तियों के लिए काम की स्थितियों को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
  • सुसाइड नोट: आत्महत्या के मामले में सुसाइड नोट महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकता है।
  • कानूनी समुदाय की भूमिका: कानूनी समुदाय को इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
  • न्यायपालिका की जिम्मेदारी: न्यायपालिका को कार्यस्थल के तनाव को कम करने के लिए उचित उपाय करने चाहिए।

नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एक स्टाफ मेंबर ने शुक्रवार को कोर्ट कॉम्प्लेक्स के भवन से कूदकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि मृतक काम के दबाव के चलते गंभीर मानसिक तनाव का सामना कर रहा था।

मृतक की पहचान साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स में कार्यरत हरीश सिंह महार के रूप में हुई। अधिकारियों के अनुसार, उनके पास से एक सुसाइड नोट प्राप्त हुआ है, जिसमें मृतक ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि वह अपनी इच्छा से यह कदम उठा रहा है और इसके लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

सुसाइड नोट में महार ने बताया कि 'अहलमद' (कोर्ट का एक अधिकारी जो रिकॉर्ड रखने और न्यायिक कार्यवाही में मदद करता है) के पद संभालने के बाद ऑफिस के काम का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। उन्होंने लिखा कि इस पद को संभालने के बाद से ही उनके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे थे, लेकिन उन्होंने यह सोचकर अपनी मानसिक स्थिति किसी के साथ साझा नहीं की कि वह काम के बोझ को संभाल लेंगे।

नोट में आगे लिखा गया है कि महार 60 प्रतिशत विकलांग थे और उन्हें इस पद की जिम्मेदारियों का सामना करना बहुत कठिन लग रहा था। उन्होंने उल्लेख किया कि नौकरी के कारण उनकी मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिससे वह दबाव में टूट गए। लगातार तनाव और अधिक सोचने के कारण नींद न आना भी उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण बताए गए।

महार ने अपने आर्थिक भविष्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की, यह कहते हुए कि समय से पहले रिटायरमेंट लेना उनके लिए सही विकल्प नहीं था। नोट के अनुसार, समय से पहले रिटायरमेंट का अर्थ होगा कि वह 60 वर्ष की उम्र तक अपनी बचत या पेंशन का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।

न्यायपालिका के प्रति एक अपील में महार ने अनुरोध किया कि विकलांग व्यक्तियों को हल्की ड्यूटी दी जाए ताकि भविष्य में अन्य लोग ऐसी ही पीड़ा न झेलें। उन्होंने नोट में एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि उनका निर्णय पूरी तरह से उनकी मर्जी का था और किसी को भी उनकी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

साकेत कोर्ट के एक वकील ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस दुखद घटना की जानकारी पाकर उन्हें गहरा सदमा लगा है। वकील ने कहा कि वह 60 प्रतिशत विकलांग थे और इस तरह की कठिन पोस्ट किसी विकलांग व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती। कानूनी समुदाय के सदस्यों ने कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है और कोर्ट स्टाफ के लिए न्याय और बेहतर काम करने की स्थितियों की मांग कर रहे हैं।

साकेत कोर्ट के एडिशनल सेक्रेटरी हितेश बैसला ने कहा कि हरीश नाम के एक कोर्ट क्लर्क ने ब्लॉक-1 की छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह 60 प्रतिशत शारीरिक रूप से विकलांग थे, उनकी उम्र लगभग 30-35 वर्ष थी और काम के दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।

Point of View

NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

यह घटना कब हुई?
यह घटना 9 जनवरी को हुई जब एक स्टाफ मेंबर ने कोर्ट कॉम्प्लेक्स से कूदकर आत्महत्या कर ली।
मृतक की पहचान क्या है?
मृतक का नाम हरीश सिंह महार है जो साकेत कोर्ट में कार्यरत थे।
क्या आत्महत्या का कारण काम का दबाव था?
जी हां, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि काम के दबाव के कारण वह मानसिक तनाव में थे।
क्या मृतक ने कोई सुसाइड नोट छोड़ा?
जी हां, मृतक ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था।
क्या इस मामले में न्यायपालिका द्वारा कोई कदम उठाया जाएगा?
इस घटना के बाद कानूनी समुदाय ने न्यायपालिका से बेहतर काम करने की स्थितियों की मांग की है।
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