दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: जीटीबीएच में पीडियाट्रिक इमरजेंसी एफएनबी कार्यक्रम शुरू, प्रतिवर्ष 2 सीटें

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दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: जीटीबीएच में पीडियाट्रिक इमरजेंसी एफएनबी कार्यक्रम शुरू, प्रतिवर्ष 2 सीटें

सारांश

दिल्ली सरकार ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल में पीडियाट्रिक इमरजेंसी मेडिसिन एफएनबी कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है — प्रतिवर्ष 2 सीटें, कोई अतिरिक्त खर्च नहीं। जहाँ सालाना 35,000 बाल आपातकालीन मरीज आते हैं, वहाँ यह कदम इलाज की गुणवत्ता को नई ऊँचाई दे सकता है।

Key Takeaways

  • दिल्ली सरकार ने 28 अप्रैल 2026 को गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबीएच) में पीडियाट्रिक इमरजेंसी मेडिसिन में एफएनबी कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया।
  • कार्यक्रम में प्रतिवर्ष 2 सीटें निर्धारित होंगी और यह नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (एनबीई) के अंतर्गत संचालित होगा।
  • जीटीबीएच में प्रतिवर्ष 30,000 से 35,000 बाल आपातकालीन मरीजों का उपचार होता है, विशेषकर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों का।
  • यह दो वर्षीय पोस्ट-एमडी सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स है; प्रशिक्षुओं को रिक्त वरिष्ठ रेजिडेंट पदों पर समायोजित किया जाएगा — कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं
  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह पहल दिल्ली की टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

दिल्ली सरकार ने 28 अप्रैल 2026 को गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबीएच), नई दिल्ली में पीडियाट्रिक्स (इमरजेंसी मेडिसिन) में फेलोशिप ऑफ नेशनल बोर्ड (एफएनबी) कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसमें प्रतिवर्ष 2 सीटें निर्धारित की जाएंगी। यह कदम बाल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण की बढ़ती माँग को देखते हुए उठाया गया है।

क्यों पड़ी इस कार्यक्रम की ज़रूरत

गुरु तेग बहादुर अस्पताल में प्रतिवर्ष लगभग 30,000 से 35,000 बाल आपातकालीन मरीजों का उपचार किया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों — विशेष रूप से 5 वर्ष से कम आयु के — का इलाज करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सकों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। पीडियाट्रिक इमरजेंसी मेडिसिन में सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण की अनुपस्थिति इलाज की गुणवत्ता पर असर डाल रही थी।

कार्यक्रम की संरचना और विशेषताएँ

यह एफएनबी कार्यक्रम नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (एनबीई) के अंतर्गत संचालित होगा। यह दो वर्षीय पोस्ट-एमडी सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स है, जो वरिष्ठ रेजिडेंसी के समकक्ष माना जाता है। गौरतलब है कि प्रशिक्षुओं को मौजूदा रिक्त वरिष्ठ रेजिडेंट पदों पर समायोजित किया जाएगा, जिससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

आम जनता और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

इस कार्यक्रम के शुरू होने से जीटीबीएच में बाल आपातकालीन इलाज की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। विशेष रूप से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए बेहतर और त्वरित आपातकालीन देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में सार्वजनिक अस्पतालों पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने इस निर्णय को टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और उन्नत चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम बताया है। सरकार के अनुसार, यह पहल दिल्ली के नागरिकों के लिए एक सशक्त और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

आगे की राह

एफएनबी कार्यक्रम की शुरुआत के साथ जीटीबीएच दिल्ली के उन चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में शामिल हो जाएगा जो पीडियाट्रिक इमरजेंसी मेडिसिन में सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। यदि यह कार्यक्रम सफल रहा, तो भविष्य में अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इसे विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या प्रतिवर्ष केवल 2 सीटें 30,000 से अधिक बाल आपातकालीन मरीजों की ज़रूरत के अनुपात में पर्याप्त हैं। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर-मरीज अनुपात पहले से ही दबाव में है, और सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण की यह पहल तब तक सीमित असर दिखाएगी जब तक इसे तेज़ी से स्केल नहीं किया जाता। रिक्त पदों पर समायोजन की रणनीति लागत-कुशल ज़रूर है, पर यह स्थायी समाधान नहीं है — दीर्घकालिक सुधार के लिए समर्पित पदों और बजट आवंटन की दरकार होगी।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

जीटीबीएच में शुरू होने वाला एफएनबी कार्यक्रम क्या है?
यह पीडियाट्रिक्स (इमरजेंसी मेडिसिन) में फेलोशिप ऑफ नेशनल बोर्ड (एफएनबी) का दो वर्षीय पोस्ट-एमडी सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स है, जो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (एनबीई) के अंतर्गत संचालित होगा। गुरु तेग बहादुर अस्पताल में प्रतिवर्ष इसमें 2 सीटें उपलब्ध होंगी।
इस कार्यक्रम से दिल्ली के मरीजों को क्या फायदा होगा?
इस कार्यक्रम से जीटीबीएच में बाल आपातकालीन इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा, विशेष रूप से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए। अस्पताल में सालाना 30,000 से 35,000 बाल आपातकालीन मरीजों का उपचार होता है, जिन्हें अब विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सक मिलेंगे।
क्या इस कार्यक्रम पर सरकार का कोई अतिरिक्त खर्च होगा?
नहीं, प्रशिक्षुओं को मौजूदा रिक्त वरिष्ठ रेजिडेंट पदों पर समायोजित किया जाएगा। इससे उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग होगा और सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
एफएनबी कार्यक्रम और एमडी में क्या अंतर है?
एफएनबी (फेलोशिप ऑफ नेशनल बोर्ड) एक पोस्ट-एमडी सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स है, यानी इसे एमडी के बाद किया जाता है। यह दो वर्षीय कोर्स वरिष्ठ रेजिडेंसी के समकक्ष है और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस द्वारा संचालित होता है।
दिल्ली में यह कार्यक्रम किसके नेतृत्व में शुरू किया गया?
यह निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार ने इसे टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और उन्नत चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया है।
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