क्या धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोका जाना सही था? झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगाई
सारांश
Key Takeaways
- धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से रोकने का मामला गंभीर है।
- झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगाई है।
- राज्य सरकार ने छात्रों के नामांकन में नियमों का उल्लंघन किया।
- अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
- छात्रों के भविष्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
रांची, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीआईटी) के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से रोकने के मामले में सीबीआई जांच पर अगले आदेश तक रोक लगाने का आदेश दिया है।
राज्य सरकार और झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) द्वारा दायर की गई अपील याचिका (एलपे) पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच ने यह निर्णय लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी) की गई है। वहीं, राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि डीआईटी को 9 सितंबर 2025 को केवल 60 विद्यार्थियों के नामांकन की अनुमति मिली थी, लेकिन संस्थान ने 138 छात्रों का दाखिला किया।
उन्होंने तर्क दिया कि नियमों का उल्लंघन करते हुए संस्थान ने हाईकोर्ट की शरण ली। अदालत को बताना पड़ा कि डीआईटी की ओर से दायर रिट याचिका पर 12 और 13 जनवरी को सुनवाई हुई थी, जिसके बाद 13 जनवरी को एकल पीठ ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार और जेयूटी ने खंडपीठ में अपील की है।
यह ध्यान देने योग्य है कि 13 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने डीआईटी के इंजीनियरिंग छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोके जाने के मामले को गंभीर मानते हुए सीबीआई जांच का निर्देश दिया था। अदालत ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए एआईसीटीई और जेयूटी की भूमिका की जांच के आदेश दिए।
एकल पीठ ने कहा था कि एआईसीटीई ने 30 अप्रैल 2025 को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए संस्थान को नामांकन की विधिवत मंजूरी दी थी, फिर भी छात्रों को परीक्षा से वंचित किया गया। अदालत ने इस स्थिति की तुलना 'नो एंट्री' के बोर्ड को हटाकर लोगों को फंसाने से की और कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितता का संकेत देता है। इसी आदेश के तहत सीबीआई को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था।