क्या छत्तीसगढ़ के कांकेर में धर्मांतरण को लेकर मचा बवाल अब थम गया?

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क्या छत्तीसगढ़ के कांकेर में धर्मांतरण को लेकर मचा बवाल अब थम गया?

सारांश

धर्मांतरण के विवाद के चलते कांकेर में मचा बवाल अब थम गया है। पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जानिए इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और प्रशासन की कार्रवाई के बारे में।

मुख्य बातें

धर्मांतरण को लेकर विवाद ने कांकेर में हिंसा को जन्म दिया।
पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए।
आदिवासी समाज ने बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाई।
प्रशासन ने हालात को संभालने में तत्परता दिखाई।
धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता को समझना महत्वपूर्ण है।

कांकेर, 19 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़े तेवड़ा में धर्मांतरण को लेकर मचे बवाल के बीच शुक्रवार को शांति का माहौल देखा गया। पिछले तीन दिनों से एक धर्मांतरित व्यक्ति के शव को गांव में दफन करने को लेकर विवाद चल रहा था। दो पक्षों के बीच हुई मारपीट के कारण इलाके में अराजकता फैल गई थी, लेकिन अब हालात में सुधार आया है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

आपको बता दें कि गुरुवार को मामला और बढ़ गया था। आदिवासी समाज के लोग रास्ते रोके हुए थे और बाहरी लोगों को आने-जाने की अनुमति नहीं दे रहे थे। वहीं, आमाबेड़ा और बड़े तेवड़ा के लोग शव को निकालने की मांग पर अड़े हुए थे। प्रशासन के शव निकालने के बाद भी स्थिति शांत नहीं हुई। गुस्साई भीड़ ने बड़े तेवड़ा गांव में बने चर्च को आग लगा दी थी, इसके बाद आमाबेड़ा में दो चर्चों में तोड़फोड़ की गई।

इस दौरान, पुलिस द्वारा रोकने पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। लोग लाठी-डंडों से पुलिसकर्मियों पर हमले करने लगे। पुलिस को भीड़ को खदेड़ने के लिए बल का प्रयोग करना पड़ा, जिसमें एडिशनल एसपी समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

घटनाक्रम को समझें तो 14 दिसंबर को बड़े तेवड़ा सरपंच रजमन सलाम के पिता का निधन हुआ। 15 दिसंबर को परिजनों ने शव को अपने खेत में दफना दिया। 16 दिसंबर को लोगों को जानकारी होने पर आक्रोश बढ़ा। मंगलवार को आसपास के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और बड़े तेवड़ा में तनाव की स्थिति बन गई। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया।

भीड़ ने मठ में तोड़फोड़ की। सरपंच और उनके साथी घटनाक्रम को देख रहे थे। बताया जाता है कि भीड़ उनकी ओर बढ़ने लगी, जिससे दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई।

17 दिसंबर को शव निकालने को लेकर दो पक्षों में विवाद बढ़ गया, जिससे हिंसा और मारपीट हुई। इस दौरान कई ग्रामीण घायल हुए।

आदिवासी समाज ने 18 दिसंबर को आमाबेड़ा जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए, बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी। दोपहर में प्रशासन ने शव को बाहर निकाला, और मामला शाम तक आगजनी और तोड़फोड़ में बदल गया। भीड़ को खदेड़ने के लिए बल का प्रयोग करना पड़ा।

अब पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में पुलिस के जवान तैनात हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इलाके में उपस्थित हैं। फिलहाल, इलाके में कोई भी भीड़ नजर नहीं आ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह न केवल स्थानीय समुदाय, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि हमें धार्मिक सहिष्णुता को बनाए रखना चाहिए।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांकेर में धर्मांतरण पर बवाल क्यों मचा?
कांकेर में एक धर्मांतरित व्यक्ति के शव के गांव में दफन को लेकर विवाद हुआ, जिससे दो पक्षों के बीच हिंसा भड़क गई।
पुलिस ने इस स्थिति को कैसे संभाला?
पुलिस ने फ्लैग मार्च निकालकर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया।
क्या स्थिति अब सामान्य हो गई है?
हां, वर्तमान में क्षेत्र में शांति का माहौल है और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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