क्या धौला कुआं बीएमडब्ल्यू एक्सीडेंट मामले में पाटियाला कोर्ट ने गगनप्रीत कौर को समन जारी किया?
सारांश
Key Takeaways
- पाटियाला कोर्ट ने गगनप्रीत कौर को समन जारी किया है।
- दुर्घटना में नवजोत सिंह की मृत्यु हुई।
- गगनप्रीत की गाड़ी की स्पीड लिमिट से अधिक थी।
- घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई।
- पुलिस ने 400 पन्नों का आरोपपत्र पेश किया है।
नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के धौला कुआं में हुए बीएमडब्ल्यू रोड एक्सीडेंट मामले में पाटियाला हॉउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट का गंभीरता से संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी गगनप्रीत कौर को 2 फरवरी को अदालत में उपस्थित होने का समन जारी किया है।
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट और उससे संबंधित दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया अपराध का प्रमाण मिलता है। पुलिस ने गगनप्रीत कौर के खिलाफ बीएमएस की धारा 105 के साथ-साथ धारा 281/125बी और 238ए के तहत आरोप पत्र दायर किया था। धौला कुआं बीएमडब्ल्यू दुर्घटना में वित्त मंत्रालय के उप सचिव नवजोत सिंह की मृत्यु हो गई।
यह हादसा 14 सितंबर की दोपहर करीब 1:30 बजे धौला कुआं के पास हुआ, जब गुरुग्राम निवासी गगनप्रीत मक्कड़ की बीएमडब्ल्यू तेज गति से मेट्रो पिलर से टकराई और पलट गई, जिससे नवजोत सिंह की मोटरसाइकिल से टकराव हुआ। इस दुर्घटना में नवजोत और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हुए। नवजोत को वेंकटेश्वरा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।
बीएमडब्ल्यू की स्पीड रिपोर्ट से यह ज्ञात हुआ कि रिंग रोड पर 50 किमी प्रति घंटे की स्पीड लिमिट होने के बावजूद कार 100-110 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही थी।
दिल्ली कैंट थाना क्षेत्र में धौला कुआं के पास पिछले वर्ष सितंबर में हुए इस बीएमडब्ल्यू हादसे में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में 400 पन्नों का आरोपपत्र पेश किया है। आरोपपत्र में उल्लेख है कि नवजोत सिंह दुर्घटना के बाद कम से कम 15 मिनट तक जीवित थे।
यदि उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिलती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। पुलिस ने आरोप लगाया है कि गगनप्रीत मक्कड़ ने जानबूझकर घायलों को जरूरी चिकित्सा सहायता पहुंचाने में देरी की, जिससे ट्रामा केयर का गोल्डन आवर बर्बाद हो गया।
पुलिस के मुताबिक, हादसे के पास दिल्ली कैंट हॉस्पिटल या एम्स ट्रामा सेंटर जैसे प्रमुख अस्पताल महज 10-15 मिनट की दूरी पर थे, लेकिन गगनप्रीत ने घायलों को 20 किलोमीटर दूर स्थित जीटीबी नगर के नुलाइफ हॉस्पिटल ले जाने का निर्णय लिया, जहां पहुंचने में 23 मिनट लगे।