चेन्नई जलभराव पर दिनाकरन का विजय सरकार पर हमला, मानसून तैयारियों पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के पूर्व गुट एएमएमके के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने 18 अक्टूबर 2026 को चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों में एक रात की भारी बारिश के बाद व्यापक जलभराव को लेकर मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार पर तीखा हमला बोला। दिनाकरन ने आरोप लगाया कि सड़कों और रिहायशी इलाकों में पानी भर जाना यह साबित करता है कि ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन और राज्य प्रशासन की मानसून-पूर्व तैयारियाँ कागज़ों तक ही सीमित रह गई हैं।
जलभराव का मुख्य घटनाक्रम
रातभर हुई लगातार बारिश के चलते चेन्नई के कई रिहायशी क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों पर पानी जमा हो गया, जिससे स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। दिनाकरन ने कहा कि मौसम विभाग की ओर से पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दी जा चुकी थी, इसके बावजूद अधिकारी जलनिकासी सुनिश्चित करने में विफल रहे।
एएमएमके नेता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि आने वाले दिनों में और अधिक भारी बारिश की आशंका के बीच सरकार नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाने जा रही है।
सरकार की तैयारियों पर सवाल
दिनाकरन ने आरोप लगाया कि ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के विभिन्न जोन में निगरानी के लिए मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति करना मात्र एक औपचारिकता है। उनके अनुसार, ऐसी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर प्रभावी एहतियाती कार्रवाई भी उतनी ही ज़रूरी है, जो अब तक नदारद रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल एक रात की बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाना यह संकेत देता है कि ज़मीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है। दिनाकरन के अनुसार केवल घोषणाओं और अधिकारियों की तैनाती से मानसून की समस्याओं से निजात नहीं मिल सकती।
प्रचार पर प्राथमिकता देने की आलोचना
एएमएमके महासचिव ने जल-निकासी बुनियादी ढाँचे के निरीक्षण के दौरान कैमरों के सामने दिखावे और सोशल मीडिया रील बनाने की प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने निगम और राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे दिखावटी प्रचार को दरकिनार कर जलभराव रोकने के वास्तविक कार्य को प्राथमिकता दें।
दिनाकरन ने सुझाया कि प्रशासन को पहले से ही उन स्थानों की पहचान करनी चाहिए जहाँ बारिश में पानी जमा होने की आशंका रहती है और भारी बारिश से पहले ही वहाँ सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि चेन्नई में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। 2015 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से शहर की जल-निकासी प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए कई योजनाएँ बनाई गईं, लेकिन नगर नियोजन विशेषज्ञों का कहना रहा है कि बुनियादी ढाँचे में सुधार की रफ़्तार शहरीकरण की तुलना में काफी धीमी रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के तटीय इलाकों में अगले कुछ हफ्तों में उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय होने की संभावना है, जो चेन्नई के लिए सालाना सबसे अधिक वर्षा का मौसम होता है।
आगे क्या
दिनाकरन ने राज्य सरकार और ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन से युद्धस्तर पर तैयारियाँ करने की माँग की है — विशेष रूप से जल-निकासी नालों की सफाई, उनकी कार्यक्षमता बहाल करने और जलभराव-संभावित क्षेत्रों में तत्काल सुधार कार्य पर ध्यान देने की अपील की है। यह देखना होगा कि तमिलनाडु सरकार इन आलोचनाओं पर क्या प्रतिक्रिया देती है और उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत से पहले क्या कदम उठाती है।