धौलीनाग देवता मंदिर: बागेश्वर की आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम
सारांश
Key Takeaways
- धौलीनाग देवता मंदिर बागेश्वर का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- यह मंदिर कालिया नाग के पुत्र को समर्पित है।
- प्रत्येक वर्ष विशेष पर्वों पर यहां पूजा-अर्चना होती है।
- यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।
- यहां की मशाल यात्रा 500 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा है।
उत्तराखंड, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मनमोहक पहाड़ों में कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल विद्यमान हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख स्थल है धौलीनाग देवता मंदिर, जो विजयपुर क्षेत्र की हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कांडा ब्लॉक में स्थित यह मंदिर कालिया नाग के पुत्र धौलीनाग को समर्पित है। इस मंदिर की भव्यता को देखने के लिए दूर-दूर से भक्तजन यहां आते हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा, "बागेश्वर जनपद के विजयपुर क्षेत्र में स्थित धौलीनाग देवता मंदिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऋषि पंचमी, नाग पंचमी और नवरात्रि की पंचमी के मौके पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। बागेश्वर आगमन पर आप भी इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।"
यह मंदिर बागेश्वर से कांडा जाने वाले मार्ग पर विजयपुर क्षेत्र में स्थित है, जो हिमालय के खूबसूरत नज़ारों से घिरा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग का मर्दन करने के बाद धौलिनाग ने यहां बांज के पेड़ पर निवास किया था। हर साल अश्विन शुक्ल पंचमी (नवरात्रि) और नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा और मेला आयोजित होता है। धपोलासेरा से भूल और धपोला के लोग कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर 22 हाथ लंबी मशाल (मशाल यात्रा) मंदिर तक लाते हैं। यह 500 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा है।
स्थानीय लोग इसे बांज के पेड़ पर स्थित एक प्राचीन स्थल मानते हैं, जहां आज एक सुंदर और भव्य मंदिर खड़ा है। यह स्थान अपने शांत वातावरण, प्राकृतिक सुंदरता और बर्फ से ढकी त्रिशूल व नंदा देवी जैसी पहाड़ियों के अद्भुत नज़ारों के लिए जाना जाता है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन स्थल है। यहां घूमने का सबसे उपयुक्त समय मार्च से जून और सितंबर से दिसंबर तक होता है, जब मौसम बहुत सुहावना रहता है।