बदलाव का चुनाव: दिलीप घोष बोले — बंपर मतदान से 90%25 पार जाएगा वोट प्रतिशत

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बदलाव का चुनाव: दिलीप घोष बोले — बंपर मतदान से 90%25 पार जाएगा वोट प्रतिशत

सारांश

पश्चिम बंगाल उपचुनाव में बंपर वोटिंग पर भाजपा के दिलीप घोष ने कहा — यह बदलाव का चुनाव है और मतदान 90%25 से ऊपर जाएगा। बालुरघाट से पूर्वी मेदिनीपुर तक शांतिपूर्ण मतदान की खबर, चुनाव आयोग की सख्ती को मिली सराहना।

Key Takeaways

  • दिलीप घोष ने कहा — पश्चिम बंगाल उपचुनाव 2026 में मतदान 90 प्रतिशत से ऊपर जाएगा।
  • खड़गपुर सदर से भाजपा उम्मीदवार ने इसे 'बदलाव का चुनाव' करार दिया।
  • एसआईआर के बाद नई मतदाता सूची में जुड़े नागरिकों ने पहली बार बड़ी संख्या में वोट डाला।
  • अलीपुरद्वार से भाजपा उम्मीदवार परितोष दास ने कहा — बंगाल विकास में अन्य राज्यों से पीछे है।
  • बालुरघाट, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्वी मेदिनीपुर में मतदान शांतिपूर्ण रहा, केंद्रीय बलों की तैनाती को सराहा गया।
  • पूर्वी मेदिनीपुर में कुछ बूथों पर ईवीएम की धीमी गति की शिकायत आई, लेकिन कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं।

खड़गपुर, 23 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में उपचुनाव के पहले चरण में जबरदस्त मतदान के बीच खड़गपुर सदर से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने साफ शब्दों में कहा कि यह महज एक चुनाव नहीं, बल्कि बदलाव का चुनाव है। उन्होंने भरोसा जताया कि मतदान प्रतिशत 90 फीसदी से ऊपर जाएगा और जनता का यह उत्साह लोकतंत्र की जीत का प्रमाण है।

दिलीप घोष का बड़ा दावा — बदलाव की लहर

दिलीप घोष ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में कहा कि एसआईआर (Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची में जिन नागरिकों के नाम जुड़े हैं, वे पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए खासे उत्साहित हैं। उनका मानना है कि यही उत्साह मतदान को ऐतिहासिक ऊंचाई तक ले जाएगा।

घोष ने कहा, "यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।" गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पिछले कई चुनावों में हिंसा और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें आम रही हैं, लेकिन इस बार के दृश्य अपेक्षाकृत अलग नजर आए।

टीएमसी पर आरोप और चुनाव आयोग की सक्रियता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों के सवाल पर दिलीप घोष ने स्वीकार किया कि ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार उनकी तीव्रता और संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने चुनाव आयोग की सराहना करते हुए कहा कि आयोग ने कड़े कदम उठाए और मतदान को सुचारू रूप से संपन्न कराया।

यह उल्लेखनीय है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में व्यापक पोस्ट-पोल हिंसा हुई थी, जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने भी की थी। उस पृष्ठभूमि में इस बार की शांतिपूर्ण वोटिंग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अलीपुरद्वार से परितोष दास — जनता में गुस्सा, बदलाव की चाह

अलीपुरद्वार विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार परितोष दास ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में हो रहा है। उन्होंने कहा, "गांव का हर नागरिक वोट डालने के लिए आतुर है।"

परितोष दास ने एक महत्वपूर्ण बात कही — "अन्य राज्य विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन बंगाल पीछे छूट गया है।" यह भावना जमीनी स्तर पर व्यापक रूप से देखी जा रही है। उन्होंने पहले चरण के मतदान को सफल बताते हुए चुनाव प्रबंधन की तारीफ की।

जमीनी रिपोर्ट — बालुरघाट से पूर्वी मेदिनीपुर तक

बालुरघाट से एक मतदाता ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि इस बार माहौल पहले से बेहतर है। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार सड़कों पर ई-रिक्शा और बाइक रैलियों की संख्या काफी कम रही, जो आमतौर पर राजनीतिक दबाव के प्रतीक माने जाते हैं।

केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और स्थानीय पुलिस की सक्रियता को लेकर मतदाताओं ने संतोष जताया। पश्चिम मेदिनीपुर से भी शांतिपूर्ण मतदान की खबर आई। हालांकि, पूर्वी मेदिनीपुर के एक मतदाता ने बताया कि ईवीएम मशीनें कुछ बूथों पर धीमी गति से काम कर रही थीं, जिससे मतदाताओं को थोड़ी प्रतीक्षा करनी पड़ी — लेकिन इसके अलावा कोई गंभीर शिकायत नहीं रही।

बड़ी तस्वीर — बंगाल की राजनीति में क्या बदल रहा है?

पश्चिम बंगाल में टीएमसी बनाम भाजपा की यह लड़ाई केवल सीटों की नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक संस्कृति को बदलने की भी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीती थीं, जो 2021 में घटकर 77 विधानसभा सीटों तक सिमट गई थीं। इस बार बंपर मतदान को भाजपा अपने पक्ष में संकेत मान रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत हमेशा सत्ताधारी दल के विरुद्ध नहीं होता, लेकिन बंगाल के संदर्भ में जहां सत्ता-विरोधी लहर और विकास की मांग प्रमुख मुद्दे हैं, यह आंकड़ा निर्णायक हो सकता है। मतगणना के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

आने वाले दिनों में शेष चरणों के मतदान और अंततः मतगणना यह तय करेगी कि दिलीप घोष का 'बदलाव का चुनाव' वाला दावा कितना सटीक साबित होता है।

Point of View

लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि 2021 में भी उच्च मतदान हुआ था और टीएमसी भारी बहुमत से जीती थी। दिलीप घोष का यह बयान कि टीएमसी की हिंसा 'पहले से कम हुई' — दरअसल यह स्वीकारोक्ति है कि समस्या अभी भी है, बस पैमाना घटा है। असली सवाल यह है कि जब बंगाल के मतदाता 'विकास की मांग' कर रहे हैं, तो क्या भाजपा के पास उस विकास का ठोस खाका है जो टीएमसी नहीं दे पाई? मतगणना से पहले दावों की इस जंग में जनता का फैसला ही अंतिम सत्य होगा।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

दिलीप घोष ने बंगाल चुनाव को 'बदलाव का चुनाव' क्यों कहा?
भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने बंपर मतदान को देखते हुए कहा कि जनता बदलाव चाहती है और यही उत्साह 90%25 से अधिक मतदान की ओर ले जाएगा। उनके अनुसार एसआईआर के बाद नई सूची में जुड़े मतदाताओं ने बड़ी संख्या में वोट डाला।
पश्चिम बंगाल उपचुनाव 2026 में मतदान प्रतिशत कितना रहा?
दिलीप घोष ने दावा किया कि मतदान 90 प्रतिशत से ऊपर जाएगा। बालुरघाट, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्वी मेदिनीपुर समेत अधिकांश क्षेत्रों में शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण मतदान की खबरें आईं।
क्या बंगाल उपचुनाव में टीएमसी की हिंसा की घटनाएं हुईं?
दिलीप घोष ने स्वीकार किया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं की ओर से कथित हमलों की घटनाएं हुईं, लेकिन पिछले चुनावों की तुलना में इनकी संख्या कम रही। चुनाव आयोग की सख्ती और केंद्रीय बलों की तैनाती को इसका श्रेय दिया गया।
अलीपुरद्वार से भाजपा उम्मीदवार ने क्या कहा?
अलीपुरद्वार से भाजपा उम्मीदवार परितोष दास ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान हुआ और जनता में बदलाव की चाह है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्य आगे बढ़ रहे हैं जबकि बंगाल पीछे रह गया है।
बंगाल चुनाव में ईवीएम को लेकर क्या शिकायत आई?
पूर्वी मेदिनीपुर के एक मतदाता ने बताया कि कुछ बूथों पर ईवीएम मशीनें धीमी गति से काम कर रही थीं, जिससे कतारें लंबी हुईं। हालांकि, इसके अलावा कोई गंभीर तकनीकी गड़बड़ी की खबर नहीं आई।
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