क्या दिलीप घोष ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया कि नागरिकों को राष्ट्रीय हित में जीना चाहिए?

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क्या दिलीप घोष ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया कि नागरिकों को राष्ट्रीय हित में जीना चाहिए?

सारांश

पश्चिम मेदिनीपुर में दिलीप घोष ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय हित में जीना चाहिए। उन्होंने ममता बनर्जी पर भी तीखा हमला किया। जानिए पूरी कहानी!

मुख्य बातें

राष्ट्र हित में जीने का महत्व मोहन भागवत का राष्ट्र के प्रति जागरूकता का संदेश राजनीतिक बयानबाजी में जागरूकता की आवश्यकता

पश्चिम मेदिनीपुर, 13 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पश्चिम बंगाल प्रमुख दिलीप घोष ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय हित में जीना चाहिए और राष्ट्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को वीर सावरकर को देशभक्ति के प्रतीक के रूप में याद करते हुए देशवासियों से अपील की कि अब राष्ट्र के लिए जीने का उचित समय है।

इस संदर्भ में दिलीप घोष ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "सरसंघचालक बार-बार देशवासियों को 'राष्ट्र सर्वप्रथम' का महत्व समझाते हैं। नागरिकों को हमेशा राष्ट्रीय हित में जीना चाहिए। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। इससे पूरे देश में सकारात्मक वातावरण बनेगा और एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के निर्माण में सहायता मिलेगी।"

दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा और कहा, "ममता बनर्जी हमेशा धमकियाँ देती रहती हैं। उनके दबाव के कारण कई बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) आत्महत्या कर रहे हैं। ममता बनर्जी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी दबाव बनाती हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "अब तक लगभग 58 लाख फर्जी मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया है। अंतिम सूची में और फर्जी मतदाताओं के नाम हटेंगे। इसी कारण ममता बनर्जी चिंतित हैं और दूसरों को भी डराने का प्रयास कर रही हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग जागरूक हैं और सत्तापक्ष की भ्रांतियों के बावजूद फॉर्म जमा कर रहे हैं।"

संसद परिसर में तृणमूल कांग्रेस के सांसद द्वारा 'ई-सिगरेट' पीने के विवाद पर दिलीप घोष ने कहा, "यह तृणमूल की संस्कृति है। संवैधानिक पदों पर रहकर लोगों का अपमान करना, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग का सम्मान न करना और कानून के खिलाफ कार्य करना। एक सांसद को इस प्रकार का व्यवहार नहीं करना चाहिए। पश्चिम बंगाल में यह संस्कृति भ्रष्ट हो चुकी है और यह पूरे देश को हानि पहुँचा रही है। इनकी भाषा और व्यवहार बेहद निंदनीय है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

ममता बनर्जी के खिलाफ बयानों में राजनीति की झलक भी दिखाई देती है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन क्यों किया?
उन्होंने कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय हित में जीना चाहिए और राष्ट्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
ममता बनर्जी पर दिलीप घोष ने क्या कहा?
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उनकी धमकियों के कारण कई बीएलओ आत्महत्या कर रहे हैं।
आरएसएस का शताब्दी वर्ष क्या है?
यह आरएसएस के 100 वर्षों के पूरे होने का उत्सव है, जिसमें संगठन के योगदान को मान्यता दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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