क्या दिलीप प्रभावलकर ने जवानी में बुजुर्गों के किरदार निभाए और थिएटर से ऑस्कर तक का सफर तय किया?
सारांश
Key Takeaways
- दिलीप प्रभावलकर ने 5 दशकों से सिनेमा में योगदान दिया है।
- फिल्म ‘दशावतार’ ने वैश्विक पहचान हासिल की है।
- उन्होंने बुखार में भी फिल्म की शूटिंग की।
- यह फिल्म भगवान विष्णु के 10 अवतारों पर आधारित है।
- फिल्म ने 5 करोड़ के बजट में 28 करोड़ की कमाई की।
मुंबई, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ईशान खट्टर और विशाल जेठवां की फिल्म ‘होमबाउंड’ के बाद अब मराठी फिल्म ‘दशावतार’ को ऑस्कर के 98वें संस्करण के लिए आधिकारिक दावेदारों की सूची में स्थान मिला है।
फिल्म का प्रीमियर 12 दिसंबर 2025 को हुआ और इसने फिल्म समीक्षकों का दिल जीतने में सफलता प्राप्त की। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में दिलीप प्रभावलकर ने अपने अद्वितीय लुक और अभिनय से सभी को प्रभावित किया।
आपको याद होगा संजय दत्त की फिल्म ‘लगे रहे मुन्ना भाई’ में महात्मा गांधी का किरदार दिलीप प्रभावलकर ने निभाया था, जिसमें उन्होंने अपनी उम्र से कहीं बड़े बुजुर्ग का किरदार किया। यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने उम्र से बड़े भूमिकाएं निभाई। इससे पहले, उन्होंने मराठी टीवी धारावाहिक ‘श्रीयुत गंगाधर टिपारे’ और चिमणराव सीरियल में गुण्ड्याभाऊ का किरदार निभाया था। अभिनेता खुद मानते हैं कि हमेशा उन्हें बुजुर्गों वाले रोल ही मिले हैं, लेकिन उन्होंने अपने किरदार को प्राथमिकता दी है।
दिलीप प्रभावलकर ने मराठी थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की और लगातार 5 दशकों से थिएटर, टीवी सीरियल और फिल्मों पर राज किया। आज 81 साल की उम्र में ‘दशावतार’ फिल्म के जरिए उन्होंने ऑस्कर के सफर को पूरा किया है। इस फिल्म में अभिनेता ने भगवान विष्णु के 10 रूपों को पूरी भक्ति और मेहनत के साथ निभाने का प्रयास किया है। वे काफी समय से बीमार रहे हैं, लेकिन ठंडी रातों और जंगलों की ठंडक ने उनकी हिम्मत को नहीं तोड़ा। उन्होंने बुखार के बावजूद पानी में जाकर शूटिंग की और अपने लुक पर दो घंटे तक मेहनत की।
‘दशावतार’ फिल्म भगवान विष्णु के 10 अवतारों पर आधारित है, जो हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और मजबूत पक्ष को दर्शाती है। फिल्म का बजट 5 करोड़ रुपए रहा, लेकिन इसने वैश्विक स्तर पर 28 करोड़ रुपए की कमाई की। यह फिल्म केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि हमारे महान ग्रंथों का एक छोटा हिस्सा है, जिसे उन्होंने विदेशों में पहुँचाया है। इस फिल्म को वैश्विक पहचान मिली है और यह पहली मराठी फिल्म है, जिसे ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया है।