दिनेश लाल यादव का ममता बनर्जी पर बयान: कुर्सी खोने का डर सता रहा है
सारांश
Key Takeaways
- ममता बनर्जी के बयानों में जनता की सोच का डर है।
- भाजपा कार्यकर्ताओं की सक्रियता चुनाव में महत्वपूर्ण है।
- खेसारी लाल यादव के भाजपा में शामिल होने की संभावना पर चर्चा।
- जनता के लिए देश की भलाई सबसे पहले है।
पटना, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भोजपुरी फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध अभिनेता और पूर्व भाजपा सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात पर अपनी राय व्यक्त की। राष्ट्र प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने ममता बनर्जी के हालिया बयानों, वोटर लिस्ट विवाद, स्टार प्रचारकों की सूची और चुनाव व संसद से संबंधित घटनाक्रम पर चर्चा की।
उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी अब बंगाल की जनता की सोच को भली-भांति समझ चुकी हैं। वे खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन असली ताकत जनता के पास है। यदि जनता किसी को चाहती है, तो वही सरकार बनेगी। बंगाल की जनता ने दीदी को सत्ता से हटाने का मन बना लिया है, और यही डर उन्हें सताता है। इसलिए वे इस प्रकार के बयान दे रही हैं।"
कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर तीन देशों (मिस्र, एंटीगुआ-बरबुडा, यूएई) के पासपोर्ट रखने और विदेशी शेल कंपनियों में निवेश के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पर हिमंता की पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले पर निरहुआ ने कहा कि यदि बिना तथ्यों की जांच किए किसी पर आरोप लगाया जाता है, तो केस दर्ज होना स्वाभाविक है। अब कांग्रेस की सरकार नहीं बनेगी, क्योंकि जनता जानती है कि कांग्रेस के पास जब मौका था, तब उन्होंने क्या किया। असम में भी उनकी सरकार थी, लेकिन उन्होंने वहाँ भी कुछ खास नहीं किया। इसी कारण जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर रखा।
स्टार प्रचारकों के बारे में निरहुआ ने कहा, "स्टार प्रचारकों के अलावा पार्टी के कार्यकर्ता भी पूरे उत्साह से काम कर रहे हैं। पार्टी में हर एक कार्यकर्ता का महत्व है और जैसे ही निर्देश मिलेंगे, सभी सक्रिय हो जाएंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारे लिए सबसे पहले देश की भलाई है। भाजपा में व्यक्ति से ऊपर पार्टी और पार्टी से ऊपर देश है। जो लोग देश सेवा का भाव रखते हैं, वे निस्वार्थ भाव से काम करते हैं।"
खेसारी लाल यादव के भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा, "यह पार्टी का निर्णय है। पार्टी का उच्च नेतृत्व तय करता है कि किसे टिकट दिया जाए या पार्टी में लाया जाए। खेसारी मेरे छोटे भाई जैसे हैं। मैंने कभी उनका विरोध नहीं किया। यदि उन्हें मौका मिलता है, तो यह खुशी की बात होगी।"