ड्रोन की शक्ति: ‘किल चेन’ में बदलाव और आधुनिक युद्ध की स्पष्टता
सारांश
Key Takeaways
- ड्रोन तकनीक में बदलाव से युद्ध की रणनीतियाँ बदल रही हैं।
- यूएएस की क्षमताएँ अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं।
- पुस्तक में ‘किल चेन’ का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
- तकनीकी विकास और साइबर खतरे का उल्लेख किया गया है।
- यह पुस्तक नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ड्रोन की असली ताकत ‘किल चेन’ में परिवर्तन और युद्ध क्षेत्र की स्पष्टता बढ़ाने में निहित है। इंडियन एयरफोर्स के एक कार्यक्रम में सोमवार को ‘अनमैन्ड एरियल सिस्टम: ट्रांसफॉर्मिंग कंटेम्पररी एयर वारफेयर’ शीर्षक वाली पुस्तक का अनावरण किया गया। दरअसल, एयरोस्पेस क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों के बीच सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मानव रहित हवाई प्रणालियों पर केंद्रित इस नई पुस्तक का विमोचन हुआ।
यह कार्यक्रम वायु सेना सभागार में आयोजित किया गया, जहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ. समीर वीके कामत ने वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस पुस्तक का लोकार्पण किया। यह पुस्तक ग्रुप कैप्टन (सेवानिवृत्त) डीके पांडेय द्वारा लिखी गई है, जो वायु रक्षा के क्षेत्र के विशेषज्ञ और रणनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने अपनी लंबी सैन्य सेवा और शोध के आधार पर आधुनिक युद्ध में मानव रहित प्रणालियों की भूमिका का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
पुस्तक में यह बताया गया है कि वायु शक्ति का विकास हमेशा तकनीकी नवाचारों जैसे जेट इंजन और सटीक हथियारों से प्रेरित रहा है। इस संदर्भ में, मानव रहित हवाई प्रणालियां (यूएएस) एक नई दिशा का प्रतिनिधित्व करती हैं। ये प्रणालियां अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वायत्त प्लेटफार्मों के रूप में हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रणनीतिक प्रतिरोध जैसे जटिल कार्यों को भी अंजाम देने में सक्षम हो गई हैं।
डॉ. पांडेय के अनुसार, यूएएस की असली ताकत ‘किल चेन’ में परिवर्तन और युद्ध क्षेत्र की स्पष्टता बढ़ाने में निहित है। निरंतर निगरानी (आईएसआर) और एल्गोरिदम आधारित लक्ष्य निर्धारण के माध्यम से ये प्रणालियां युद्ध संचालन की प्रकृति को बदल रही हैं। ये कम संसाधनों में भी अधिक प्रभाव उत्पन्न कर रही हैं, चाहे वह आतंकवाद विरोधी अभियान हो या उच्च तीव्रता वाला पारंपरिक युद्ध। यह पुस्तक तीन प्रमुख भागों में विभाजित है।
पहले भाग में तकनीकी विकास और मानवयुक्त बनाम मानव रहित प्लेटफार्मों की श्रेष्ठता पर चर्चा की गई है। दूसरे भाग में भारत और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यूएएस के प्रसार और उससे जुड़े रणनीतिक पहलुओं को समझाया गया है, विशेषकर विवादित सीमाओं और ग्रे-जोन युद्ध के संदर्भ में। तीसरे भाग में भविष्य की अवधारणाओं जैसे मैनड-अनमैनड टीमिंग, स्वार्म युद्ध और काउंटर-यूएएस प्रणालियों पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें यूएएस को सर्वसमाधान के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि इसकी कमजोरियों जैसे साइबर खतरे और स्पेक्ट्रम पर निर्भरता का भी गंभीर विश्लेषण किया गया है।
इस प्रकार, यह पुस्तक नीति निर्माताओं, सैन्य अधिकारियों और शोधकर्ताओं के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करती है। डॉ. दिनेश कुमार पांडेय वायु रक्षा के क्षेत्र में मास्टर फाइटर कंट्रोलर रह चुके हैं और छह एयर डिफेंस इकाइयों का नेतृत्व कर चुके हैं। वे एयर स्टाफ निरीक्षण और संयुक्त नियंत्रण एवं विश्लेषण केंद्र में निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे एक वरिष्ठ फेलो के रूप में रणनीतिक अध्ययन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और विभिन्न शैक्षणिक एवं नीतिगत संस्थानों से जुड़े हुए हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुस्तक आधुनिक वायु और सूचना युद्ध के बदलते स्वरूप को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह आने वाले समय में सैन्य रणनीतियों और तकनीकी विकास की दिशा तय करने में सहायक हो सकती है।