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राजस्थान के डीडवाना-कुचामन में नकली एनसीईआरटी किताबों की बिक्री: अभिभावकों की चिंता

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राजस्थान के डीडवाना-कुचामन में नकली एनसीईआरटी किताबों की बिक्री: अभिभावकों की चिंता

सारांश

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में नकली एनसीईआरटी किताबों की बिक्री ने अभिभावकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। ये किताबें असली किताबों की तरह दिखती हैं, लेकिन गुणवत्ता में भारी अंतर है। क्या शिक्षा प्रणाली को खतरा है?

मुख्य बातें

डीडवाना-कुचामन में नकली एनसीईआरटी किताबों की बिक्री का गंभीर मामला।
असली किताबों की गुणवत्ता में भारी अंतर।
अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी।
सरकारी स्कूलों में किताबों की कमी का फायदा उठाया जा रहा है।
नकली किताबों की पहचान करना आवश्यक है।

डीडवाना-कुचामन, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में नकली एनसीईआरटी किताबों की बिक्री का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिससे छात्रों के भविष्य के प्रति चिंताएं बढ़ गई हैं। बाजार में बड़े पैमाने पर ऐसी किताबें बेची जा रही हैं, जो बाहरी दृष्टि से असली एनसीईआरटी किताबों के समान प्रतीत होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता और मानक में काफी अंतर हैं।

स्थानीय समाचारों के अनुसार, इन नकली किताबों में 80 जीएसएम (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) कागज के उपयोग का दावा किया गया है, जबकि वास्तव में इसमें बेहद निम्न गुणवत्ता वाला अखबारी कागज इस्तेमाल किया गया है। इन किताबों में न तो कोई वाटरमार्क है, न ही प्रिंट संख्या या प्रकाशक की सही जानकारी है, जबकि असली एनसीईआरटी और राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल की किताबों में सभी सुरक्षा मानक मौजूद होते हैं।

असली किताबों में प्रत्येक पृष्ठ पर एनसीईआरटी या आरएसटीबी का वाटरमार्क स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और प्रिंटिंग की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। जबकि नकली किताबों में न तो ये सुरक्षा फीचर्स हैं और न ही प्रिंटिंग मानक उचित हैं। इसके बावजूद, इन किताबों को असली किताबों की कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी व्याप्त है।

रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि जिले के सरकारी स्कूलों में अब तक सभी छात्रों को मूल किताबें उपलब्ध नहीं हुई हैं, जिससे कुछ दुकानदार इस कमी का फायदा उठाकर नकली किताबें बेच रहे हैं। ये भी बताया गया है कि कुछ बड़े बुक सेलर के पास राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल की किताबें उपलब्ध हैं, लेकिन वे भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं।

इस मामले पर बात करते हुए राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल के नागौर डिपो के अधिकारियों ने मान्यता दी है कि बाजार में बिक रहीं किताबें नकली और कॉपी प्रतीत होती हैं। अधिकारियों ने इस मामले की सूचना उच्च स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है।

जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह ने कहा कि कक्षा सातवीं तक का पाठ्यक्रम अब एनसीईआरटी के अंतर्गत लागू किया गया है और राजस्थान में एनसीईआरटी और आरएसटीबी दोनों की किताबों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार में उपलब्ध किताबें कॉपी की तरह दिखती हैं, लेकिन उन पर सिर्फ एनसीईआरटी का नाम होने के कारण कार्रवाई करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा प्रणाली और किताबों के वितरण तंत्र पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि यदि इस पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका प्रत्यक्ष प्रभाव छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शिक्षा प्रणाली में व्याप्त कमजोरियों को भी उजागर करता है। बाजार में नकली किताबों की बिक्री चिंता का विषय है और इसे तुरंत संबोधित करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीडवाना-कुचामन में नकली किताबों की पहचान कैसे करें?
नकली किताबों की पहचान करने के लिए, उनके वाटरमार्क, प्रिंटिंग गुणवत्ता और प्रकाशक की जानकारी की जांच करें।
क्या इस मामले पर कोई कार्रवाई हुई है?
अधिकारियों ने इस मामले की उच्च स्तर पर रिपोर्ट भेजने का आश्वासन दिया है।
अभिभावक इस स्थिति में क्या कर सकते हैं?
अभिभावकों को सरकारी शिक्षा विभाग से संपर्क करना चाहिए और अपनी चिंताओं को व्यक्त करना चाहिए।
क्या असली एनसीईआरटी किताबें बाजार में उपलब्ध हैं?
कुछ बुक सेलर के पास असली किताबें मौजूद हैं, लेकिन उनकी संख्या सीमित है।
नकली किताबों की बिक्री का छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
नकली किताबें छात्रों की शिक्षा में बाधा डाल सकती हैं और उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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