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फणीश्वरनाथ रेणु: साहित्य और समाज के सच्चे चित्रकार

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फणीश्वरनाथ रेणु: साहित्य और समाज के सच्चे चित्रकार

सारांश

11 अप्रैल को फणीश्वरनाथ रेणु का निधन हुआ था, लेकिन उनकी लेखनी आज भी हमारे जीवन में जीवित है। जानिए उनके साहित्यिक सफर और समाज में उनकी भूमिका के बारे में।

मुख्य बातें

फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को हुआ था।
उन्होंने 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।
उनके साहित्य में ग्रामीण जीवन का अद्भुत चित्रण है।
'मैला आंचल' उनके प्रमुख उपन्यासों में से एक है।
भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हर वर्ष की 11 अप्रैल केवल एक तारीख नहीं है। यह दिन उस आवाज के मौन का प्रतीक है जिसने गांव, खेत, गंध, लोक और मनुष्य के छोटे-छोटे सुख-दुखों को शब्दों में ऐसे ढाला कि वे सदैव के लिए जीवित हो गए। वर्ष 1977 में 11 अप्रैल को ही प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का निधन हुआ था। इस दिन उनकी आवाज भले ही हमेशा के लिए खामोश हो गई, लेकिन उनकी लिखावट आज भी रंगमंच से लेकर आम आदमी के जीवन में जीवित है।

बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गांव में 4 मार्च 1921 को जन्मे रेणु एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से थे। उनके पिता का नाम शिलानाथ और माता का नाम पानो देवी था। उनका बचपन यहीं व्यतीत हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अररिया और फारबिसगंज में ग्रहण की। मैट्रिक के बाद वे बनारस गए, लेकिन वहां अधिक समय नहीं टिक सके और वापस बिहार लौट आए। भागलपुर के कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनका झुकाव सक्रिय राजनीति की ओर हुआ और वे समाजवादी आंदोलन से प्रभावित हुए। 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया और जेल भी गए।

भारत-नेपाल सीमा के निकट जन्म लेने के कारण नेपाल की सशस्त्र क्रांति में भी उनकी गहरी रुचि रही। 1950 में नेपाल की एकतंत्रीय राजशाही के खिलाफ संघर्ष में उन्होंने विद्रोही सेना के साथ सक्रिय भूमिका निभाई और विद्रोहियों के ‘नेपाल रेडियो’ के पहले डायरेक्टर जनरल बने। वे लंबे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे। 1952-53 के दौरान लंबी बीमारी ने उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया। यही वह क्षण था जब उन्होंने साहित्य को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हालांकि उनकी राजनीतिक सजगता अंत तक कायम रही और उन्होंने देश में आपातकाल का कड़ा विरोध किया। 1954 में प्रकाशित उनका पहला उपन्यास ‘मैला आंचल’ हिंदी साहित्य में एक मील का पत्थर साबित हुआ और यहीं से उनकी पहचान एक बड़े कथाकार के रूप में स्थापित हो गई।

फणीश्वरनाथ रेणु को हिंदी साहित्य में आंचलिक युग की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने प्रेमचंद के समय से शुरू हुई आंचलिकता की प्रवृत्ति को अपने लेखन में पूर्ण विस्तार दिया। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन का जो गहन, रागात्मक और रसपूर्ण चित्रण मिलता है, वह हिंदी कथा-साहित्य में अद्वितीय है। उनकी भाषा-शैली, जिसमें लोकभाषा, बोली और जीवन की सादगी का सुंदर मेल है, ने साहित्य को एक नया आयाम दिया।

'मैला आंचल' के बाद उनके उपन्यास 'परती परिकथा' और कहानी 'मारे गए गुलफाम' ने उनकी ख्याति को और विस्तार दिया। 'मारे गए गुलफाम' पर शोमैन राजकपूर अभिनीत प्रसिद्ध फिल्म 'तीसरी कसम' बनी। उन्होंने केवल उपन्यास और कहानियां ही नहीं लिखीं, बल्कि निबंध, रिपोर्ताज और संस्मरण जैसी गद्य विधाओं में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। रेणु के उपन्यास में मैला आंचल, परती परिकथा, जुलूस, पल्टू बाबू रोड, दीर्घतपा, कितने चौराहे शामिल हैं। वहीं, कहानी संग्रह में ठुमरी, एक आदिम रात्रि की महक, अग्निखोर, मेरी प्रिय कहानियां, एक श्रावणी दोपहरी की धूप, अच्छे आदमी शामिल हैं। रेणु की चर्चित कहानियों में मारे गए गुलफाम, एक आदिम रात्रि की महक, लाल पान की बेगम, पंचलाइट, तबे एकला चलो रे, ठेस और संवदिया का उल्लेख विशेष रूप से किया जाता है।

भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया और उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया गया। रेणु का साहित्य आज भी महसूस किया जाता है। उनकी कहानियों में बहती नदी, खेतों की हरियाली, लोकगीतों की गूंज और आम आदमी की पीड़ा सब जीवंत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सच्चाइयों को उजागर किया। उनका योगदान न केवल साहित्यिक है, बल्कि सामाजिक भी, जिसने भारतीय समाज के कई पहलुओं को चित्रित किया।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फणीश्वरनाथ रेणु कौन थे?
फणीश्वरनाथ रेणु एक प्रमुख हिंदी साहित्यकार थे, जिन्होंने ग्रामीण जीवन को अपने लेखन में महत्वपूर्ण स्थान दिया।
उनकी प्रमुख रचनाएं कौन सी हैं?
उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मैला आंचल', 'परती परिकथा' और 'मारे गए गुलफाम' शामिल हैं।
क्या रेणु को किसी पुरस्कार से नवाजा गया है?
जी हां, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
रेणु का साहित्य किस विषय पर केंद्रित है?
उनका साहित्य मुख्य रूप से ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति और समाज की सच्चाइयों पर केंद्रित है।
कब उनका निधन हुआ था?
फणीश्वरनाथ रेणु का निधन 11 अप्रैल 1977 को हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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