क्या डीके शिवकुमार ने गणेश चतुर्थी पर दी बधाई और कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा जताई?

सारांश
Key Takeaways
- गणेश चतुर्थी पर शुभकामनाएँ दी गईं।
- कांग्रेस के प्रति निष्ठा को स्पष्ट किया गया।
- राजनीतिक अध्ययन का महत्व बताया गया।
- जेल में बिताए समय का जिक्र किया गया।
- राजनीतिक दबाव का खंडन किया गया।
बेंगलुरु, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को पत्रकारों से संवाद करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ भी दीं।
शिवकुमार ने आरएसएस गाना विवाद पर कहा, "कुछ समय पहले विधानसभा में हुई भगदड़ की घटना के संदर्भ में मैंने कुछ बातें कहीं थीं। मेरा उद्देश्य किसी की प्रशंसा करना नहीं था, बल्कि मैंने केवल टिप्पणी की और उनकी आलोचना करने का प्रयास किया।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति और एनएसयूआई में आने से पूर्व उन्होंने कांग्रेस, आरएसएस, भाजपा, कम्युनिस्टों और अन्य राजनीतिक दलों के इतिहास का गहराई से अध्ययन किया। 47 वर्ष की आयु में विधायक बनने के बाद उन्होंने डिग्री प्राप्त की और अपने राजनीतिक ज्ञान को मजबूत किया।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के प्रति मेरी निष्ठा पर किसी को प्रश्न नहीं उठाना चाहिए। मैं जन्म से कांग्रेसमैन हूँ और हमेशा रहूँगा।"
शिवकुमार ने बताया कि विलासराव देशमुख की सरकार के समय से उन्होंने 100 से अधिक विधायकों को पार्टी में शामिल किया है। मुझे जेल में बिना कुर्सी के यातनाएँ सहनी पड़ीं। मुझे बिना किसी आरोप के सलाखों के पीछे रखा गया। ईडी के सभी मामले सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुके हैं। लेकिन, ये सब अतीत की बातें हैं। अब इनका जिक्र करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने बयान किसी राजनीतिक दबाव में नहीं दिया, न ही किसी ने उन्हें ऐसा करने को कहा। उन्होंने कहा, "अगर किसी को मेरी बातों से ठेस पहुंची हो, तो मुझे खेद है। मेरा उद्देश्य किसी को दुख देना नहीं है।"
उन्होंने बताया, "1980 में मैंने कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की थी। जब विधायक बना, तब मैं ग्रेजुएट भी नहीं था। लेकिन, बाद में मुझे एहसास हुआ कि स्नातक होना आवश्यक है। एक राजनेता के रूप में मैं सभी दलों के इतिहास से परिचित हूँ। लेकिन, कई मुद्दों का मैं खुलासा नहीं करना चाहता।"
डीके शिवकुमार ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आभार व्यक्त किया और कहा कि मैं लंबे समय से उनके अधीन काम कर रहा हूँ और कांग्रेस भवन को एक मंदिर की तरह पूजना चाहिए, क्योंकि यह हमें नई दिशा प्रदान करता है। गांधी परिवार और कांग्रेस के प्रति मेरी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठ सकता। मैंने जेल, मुकदमे और हर चुनौती का सामना किया, लेकिन पार्टी के प्रति मेरा समर्पण अटूट है।