क्या डीआरडीओ ने 68वां स्थापना दिवस मनाया? राजनाथ सिंह और संजय सेठ ने मुख्यालय का दौरा किया!
सारांश
Key Takeaways
- डीआरडीओ ने 68वां स्थापना दिवस मनाया।
- भविष्य में 2025 और 2026 के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रगति की बात की।
- नए 22 सिस्टम की मंजूरी मिली है।
- कार्यक्रम का प्रसारण सभी प्रयोगशालाओं में हुआ।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 1 जनवरी को अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा किया और वर्ष 2025 में डीआरडीओ की उपलब्धियों तथा 2026 के लक्ष्यों की समीक्षा की।
इसके बाद रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने डीआरडीओ परिवार को संबोधित किया। यह कार्यक्रम डीआरडीओ की सभी प्रयोगशालाओं में लाइव प्रसारित किया गया।
डॉ. कामत ने डीआरडीओ के कर्मचारियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डीआरडीओ के प्रयासों से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा क्षेत्र में देश ने बड़ी प्रगति की है। उन्होंने वैज्ञानिकों से साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई जरूरतों पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ के अनुसंधान और विकास कार्यों से रक्षा निर्माण क्षेत्र में उद्योगों को भी मजबूती मिली है।
वर्ष 2025 की उपलब्धियों पर बात करते हुए डीआरडीओ अध्यक्ष ने कहा कि कई नए सिस्टम तैयार कर उपयोगकर्ताओं को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि देश की भविष्य की चुनौतियों से निपटने और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए डीआरडीओ को रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने बताया कि डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल और सर्विसेज प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने डीआरडीओ द्वारा विकसित 22 सिस्टम को शामिल करने की मंजूरी दी है। इनकी कुल लागत लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपए है और इनका निर्माण भारतीय उद्योगों द्वारा किया जाएगा। यह किसी एक साल में अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी है। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, अस्त्र मिसाइल, नाग एंटी-टैंक मिसाइल, एडवांस्ड टॉरपीडो, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, माउंटेन रडार और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।
डॉ. कामत ने यह भी बताया कि नाग मिसाइल सिस्टम, अश्विनी रडार, एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार, हेलीकॉप्टरों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, पिनाका रॉकेट सिस्टम और अन्य उपकरणों के लिए लगभग 26,000 करोड़ रुपए के 11 अनुबंध किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि 2025 में डीआरडीओ द्वारा विकसित कई उत्पादों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की सेवाओं में भी शामिल किया गया है।
डीआरडीओ अध्यक्ष ने बताया कि कई सिस्टम के उपयोगकर्ता परीक्षण 2025 में पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं। इनमें प्रलय मिसाइल, आकाश मिसाइल, पिनाका रॉकेट, टॉरपीडो, पनडुब्बी के लिए कॉम्बैट सिस्टम, एंटी-टैंक मिसाइल, बॉर्डर सर्विलांस सिस्टम और सेना के लिए सॉफ्टवेयर आधारित रेडियो शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कई अन्य सिस्टम या तो पूरे हो चुके हैं या परीक्षण के अलग-अलग चरणों में हैं। इनमें इंडियन लाइट टैंक, शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, क्रूज मिसाइल, रुद्रम-2 मिसाइल, ग्लाइड बम ‘गौरव’, लंबी दूरी के रडार, माइक्रोवेव सिस्टम और विमान सुरक्षा से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।
डॉ. कामत ने भरोसा जताया कि डीआरडीओ की सभी प्रयोगशालाएं पूरी कोशिश करेंगी कि जो सिस्टम अभी परीक्षण में हैं, उन्हें जल्द से जल्द सफलतापूर्वक पूरा कर सेना और सुरक्षा बलों को उपलब्ध कराया जा सके।