क्या त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने छात्रों से ज्ञान, तकनीक और आध्यात्मिकता के समन्वय का आह्वान किया?
सारांश
Key Takeaways
- ज्ञान, तकनीक, और आध्यात्मिकता का समन्वय आवश्यक है।
- शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है।
- टीबीएसई के स्वर्ण जयंती वर्ष में नई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
- शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- राज्य में नए कॉलेज और तकनीकी संस्थान खोले जा रहे हैं।
अगरतला, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार को छात्रों से ज्ञान, आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिकता के समन्वय के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि नैतिकता और व्यावहारिक ज्ञान के साथ एक सार्थक भविष्य का निर्माण करना होना चाहिए।
नज़रुल कलाक्षेत्र में त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (टीबीएसई) के स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के साथ-साथ छात्रों को आधुनिक तकनीक का उपयोग कर व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक जीवन के कौशल भी प्राप्त करने चाहिए।
मुख्यमंत्री साहा ने कहा, “सफल भविष्य के लिए सच्ची शिक्षा और नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को समाज में एक अलग पहचान स्थापित करने में मदद करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताने से छात्रों को मानसिक शांति और एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर लागू किया गया है, ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और छात्र-केंद्रित बनाया जा सके।
उन्होंने कहा, “शिक्षित युवा दुनिया की सबसे बड़ी पूंजी हैं। शिक्षा के साथ तकनीक को जोड़ा गया है और प्रधानमंत्री भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार भी समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई परियोजनाएं लागू कर रही है।”
टीबीएसई की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बोर्ड की स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी और यह वर्ष उसका स्वर्ण जयंती वर्ष है। उन्होंने बोर्ड को और सशक्त बनाने के लिए पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुभव से मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता पर बल दिया। साहा ने कहा कि एनईपी लागू होने के बाद टीबीएसई परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों के प्रदर्शन में सुधार देखा गया है और बोर्ड को शैक्षणिक परिणामों को और बेहतर बनाने के लिए नई पहल करनी चाहिए।
राज्य सरकार की प्रमुख शैक्षणिक पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने निपुण त्रिपुरा, मिशन मुकुल और विद्या सेतु मॉड्यूल जैसी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छात्राओं को साइकिलें दी जा रही हैं और उच्च शिक्षा के इच्छुक छात्रों के लिए ‘सुपर 30’ परियोजना शुरू की गई है। शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 7,700 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं शुरू की गई हैं, जिससे शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसके साथ ही जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों के लिए नए छात्रावास खोले गए हैं। पीएम जनमन सहित विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 47 छात्रावासों का निर्माण किया गया है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य का लक्ष्य त्रिपुरा के 58 ब्लॉकों में से प्रत्येक में एक-एक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित करना है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार करते हुए नए कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान खोले जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2022 से 2025 के बीच माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 23 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किए और टीबीएसई के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग के सचिव रावल हेमेंद्र कुमार, विवेकनगर रामकृष्ण मठ के महाराज स्वामी भक्तिसुधानंद, टीबीएसई के अध्यक्ष धनंजय गणचौधरी और बोर्ड सचिव जयदीप भट्टाचार्य सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।