डीआरआई ने ₹1.8 करोड़ का सोना जब्त किया, लगेज ट्रॉलियों में छिपाकर कुआलालंपुर से लाई थी खेप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने 9 अक्टूबर 2026 को सोने की तस्करी के एक चतुर मामले का भंडाफोड़ करते हुए 1.3 किलोग्राम सोने के बिस्कुट जब्त किए, जिनकी कीमत लगभग ₹1.8 करोड़ बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, दो आरोपियों ने यह सोना मलेशिया के कुआलालंपुर से लाकर एयरपोर्ट की लगेज ट्रॉलियों में चिपकाकर छिपा दिया था। यह मामला तस्करी के एक नए और खतरनाक तरीके को उजागर करता है, जिसमें निर्दोष यात्रियों को अनजाने में वाहक बनाया जाता है।
तस्करी का तरीका
जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने एयरपोर्ट की साझा लगेज ट्रॉलियों के निचले हिस्से में सोने के बिस्कुट चिपका दिए। इसके बाद उन्होंने ऐसे भोले-भाले यात्रियों को निशाना बनाया जो इन्हीं ट्रॉलियों का उपयोग करते हुए सीमा शुल्क जाँच पार कर रहे थे। आरोपियों ने यात्रियों का पीछा किया और कस्टम्स क्षेत्र पार होते ही ट्रॉलियों से सोना निकाल लिया। इस तरह वे बिना किसी प्रत्यक्ष जोखिम के तस्करी को अंजाम दे रहे थे।
गौरतलब है कि इस पद्धति में यात्री को तस्करी का कोई ज्ञान नहीं होता — वह अनजाने में ही माल ढोने का जरिया बन जाता है। यह 'मानव वाहक' मॉडल से एक कदम आगे की तकनीक है, जो जाँच एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ाती है।
डीआरआई की कार्रवाई
खुफिया सूचना के आधार पर DRI के अधिकारियों ने सतर्कता बरतते हुए ट्रॉलियों की बारीकी से जाँच की और सोने के बिस्कुट बरामद किए। दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। जाँच अब उनके कथित तस्करी नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और इस पद्धति से पहले की गई तस्करी की संख्या पर केंद्रित है।
मुंबई में इससे पहले की बड़ी कार्रवाई
यह ऐसे समय में आया है जब DRI की मुंबई ज़ोनल यूनिट ने 23 सितंबर 2026 को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक और बड़ी कार्रवाई की थी। मुंबई एयरपोर्ट कस्टम्स की एयर इंटेलिजेंस यूनिट के सहयोग से की गई इस कार्रवाई में दुबई से आए तीन भारतीय यात्रियों के पास से 9.40 किलोग्राम शुद्ध सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग ₹14.81 करोड़ आँकी गई।
उस मामले में सोने को बेहद चालाकी से दूध पाउडर, ओट्स, विभिन्न प्रकार के आटे, न्यूटेला और नारियल के दूध के पाउडर जैसे आम दिखने वाले फूड पैकेट्स में छिपाया गया था। विदेशी मूल के सोने को बारीक पाउडर में बदलकर इन उत्पादों में मिलाया गया था ताकि रंग और बनावट एक समान दिखे। तीनों यात्रियों के सामान से कुल मिलाकर लगभग 33.50 किलोग्राम ऐसे फूड उत्पाद बरामद हुए जिनमें सोने का पाउडर मिला था।
पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि वे एक ही संगठित तस्करी गिरोह के लिए काम कर रहे थे। तीनों को कस्टम्स एक्ट, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया।
बढ़ती तस्करी और जाँच एजेंसियों की चुनौती
पिछले कुछ हफ्तों में DRI की ये कार्रवाइयाँ दर्शाती हैं कि तस्करी गिरोह लगातार नए और परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं — चाहे वह खाद्य उत्पादों में सोने का पाउडर मिलाना हो या ट्रॉलियों में बिस्कुट छिपाना। सोने की तस्करी भारत में एक संगठित आपराधिक उद्योग का रूप ले चुकी है, जिसे उच्च आयात शुल्क आंशिक रूप से प्रेरित करता है।
आगे की जाँच यह स्पष्ट कर सकती है कि यह नेटवर्क कितना व्यापक है और क्या दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है।