कैप्टन स्मित मच्छार के परिजनों से मिले भारतीय राजदूत, 174 लोगों के रक्षक को सलाम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राजदूत डॉ. दीपक मित्तल और कॉन्सल जनरल डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी ने 1 अक्टूबर 2026 को दुबई में फ्लाइट एफजेड 1073 के बहादुर पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के परिवार से मुलाकात की। 174 यात्रियों की जान बचाने वाले इस भारतीय मूल के पायलट के परिजनों को राजनयिकों ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया तथा यूएई के अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने का वादा किया।
राजनयिक मुलाकात का विवरण
संयुक्त अरब अमीरात में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश जारी कर इस भेंट की पुष्टि की। संदेश में कहा गया कि राजदूत और कॉन्सल जनरल ने कैप्टन मच्छार के परिवार से मिलकर दूतावास एवं वाणिज्य दूतावास की ओर से पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही, यूएई प्रशासन के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने का भरोसा भी दिलाया गया।
क्या हुआ था बुधवार को
बुधवार को दुबई से तेलअवीव जा रहे फ्लाई दुबई के विमान को क्रैश कराने की कथित साजिश को कैप्टन मच्छार ने नाकाम कर दिया। बताया जाता है कि वे इस संघर्ष में बुरी तरह घायल हो गए — सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो में वे खून से लथपथ दिखे। घायल अवस्था में भी कॉकपिट का दरवाजा खोलने तक उनकी भूमिका निर्णायक रही, जिसने 174 यात्रियों की जान बचाई।
अंततः विमान की सकुशल लैंडिंग सऊदी अरब के तबूक हवाई अड्डे पर कराई गई। फिलहाल कैप्टन स्मित मच्छार अस्पताल में भर्ती हैं और उनका उपचार जारी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इज़राइली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अपने देश की ओर से कैप्टन मच्छार के प्रति आभार व्यक्त किया, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें 'हीरो' करार दिया। भारत में इज़राइल के राजदूत ने इस घटना को आतंकवाद के सामने न झुकने की मिसाल बताया। उन्होंने कहा, '...हम जानते हैं कि आतंकवाद से लड़ने के लिए सरकारों का मिलकर काम करना ही काफी नहीं है। यह जरूरी है कि लोग भी मिलकर काम करें, जैसा कि हमने बुधवार को देखा।' उन्होंने आगे जोड़ा कि यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे आतंकवादियों के सामने घुटने न टेककर और व्यक्तिगत स्तर पर मिलजुलकर अपना भविष्य तय किया जा सकता है।
क्या होगा आगे
भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह कैप्टन मच्छार के परिवार के साथ निरंतर संपर्क में रहेगा और उनके उचित इलाज व हर संभव सहायता के लिए यूएई एवं संबंधित अधिकारियों से समन्वय जारी रखेगा। यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारत-इज़राइल के बीच आतंकवाद-विरोधी सहयोग पहले से मजबूत है, और यह मामला दोनों देशों के नागरिकों की साझी साहसगाथा के रूप में उभरा है।