13 अक्टूबर 2026
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दुष्यंत गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर उत्तराखंड कांग्रेस का विरोध, अंकिता भंडारी कांड का उठाया मुद्दा

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दुष्यंत गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर उत्तराखंड कांग्रेस का विरोध, अंकिता भंडारी कांड का उठाया मुद्दा

सारांश

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने से उत्तराखंड कांग्रेस आहत है — और इसकी वजह महज़ राजनीतिक नहीं, बल्कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के वे अनुत्तरित सवाल हैं जो पूरे प्रदेश को अब भी परेशान करते हैं। कांग्रेस का गांधी पार्क में मौन उपवास एक भावनात्मक संदेश है, लेकिन असली परीक्षा सीबीआई जाँच की माँग को कितनी दूर तक ले जाया जाता है।

मुख्य बातें

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर उत्तराखंड कांग्रेस ने 13 अक्टूबर 2026 को विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस नियुक्ति को उत्तराखंड की जनभावनाओं का अपमान बताया और इसे PM मोदी व केंद्र सरकार की असंवेदनशीलता करार दिया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जाँच की माँग के बीच यह नियुक्ति हुई; परिवार के सवाल अब भी अनुत्तरित बताए जा रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि BJP उत्तराखंड के स्वाभिमान को चुनौती दे रही है।
पार्टी ने देहरादून के गांधी पार्क में एक घंटे के मौन उपवास की घोषणा की; नेतृत्व की बैठक के बाद आगे की रणनीति तय होगी।

उत्तराखंड कांग्रेस ने 13 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पार्टी प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का हवाला देते हुए इस नियुक्ति को उत्तराखंड की जनभावनाओं का अपमान करार दिया। पार्टी ने विरोध-स्वरूप देहरादून के गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास करने का ऐलान किया है।

नियुक्ति पर कांग्रेस की आपत्ति

गणेश गोदियाल ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को उत्तराखंड के जनमानस की भावनाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने और अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जाँच की माँग किए जाने के संदर्भ में कई अनुत्तरित सवाल अब भी बने हुए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जाँच के सवालों का समाधान करने के बजाय दुष्यंत गौतम को सीधे राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का उत्तराखंड की संवेदनाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया है।

अंकिता भंडारी मामले का संदर्भ

गोदियाल ने यह भी कहा कि परिवार की माँग के अनुसार मामले की जाँच इस पहलू को ध्यान में रखकर होनी चाहिए कि कथित वीआईपी कौन था। उनके अनुसार अंकिता के माता-पिता को अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है और न्याय की प्रतीक्षा जारी है। गौरतलब है कि यह नियुक्ति ऐसे समय आई है जब यह मामला उत्तराखंड में एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बना हुआ है।

गरिमा दसौनी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तराखंड के स्वाभिमान और भावनाओं को चुनौती दे रही है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों की जाँच की माँग के बीच दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पद दिया जाना अस्वीकार्य है। दसौनी ने कहा कि अंकिता उत्तराखंड की बेटी और बहन थीं तथा प्रदेश के लोगों की भावनाएँ उनके परिवार के साथ जुड़ी हैं।

विरोध की रणनीति

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास विरोध की शुरुआत भर है। पार्टी के अन्य नेता फ़िलहाल दिल्ली में हैं और उनके लौटने के बाद बैठक कर आगे के विरोध कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी। गोदियाल ने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर भी विरोध दर्ज कराया जा सकता है और केंद्र सरकार तक उत्तराखंड के लोगों की नाराज़गी पहुँचाने के हर संभव प्रयास किए जाएँगे। यह देखना होगा कि नेतृत्व की बैठक के बाद कांग्रेस इस मुद्दे को किस तरह राष्ट्रीय स्तर पर उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अंकिता भंडारी हत्याकांड के अनुत्तरित सवालों की वजह से इसकी नैतिक धार कहीं अधिक तीखी है। असली मुद्दा यह है कि परिवार की सीबीआई जाँच की माँग और कथित वीआईपी की पहचान का सवाल अब भी अधर में लटका है — और ऐसे में यह नियुक्ति एक संवेदनशील प्रदेश में संस्थागत जवाबदेही को लेकर गहरे सवाल खड़े करती है। मौन उपवास प्रतीकात्मक कदम है, पर असली कसौटी यह होगी कि क्या विपक्ष इस नियुक्ति को संसद और न्यायिक मंचों तक ले जाने का साहस दिखाता है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुष्यंत गौतम को किस पद पर नियुक्त किया गया है?
दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की गई है और इसी पर उत्तराखंड कांग्रेस ने 13 अक्टूबर 2026 को विरोध दर्ज कराया है।
उत्तराखंड कांग्रेस को इस नियुक्ति पर आपत्ति क्यों है?
कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने और परिवार द्वारा सीबीआई जाँच की माँग किए जाने के बावजूद उन्हें राज्यपाल नियुक्त किया गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार यह उत्तराखंड की जनभावनाओं और न्याय की माँग का अपमान है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड की एक युवती थीं जिनकी हत्या एक संवेदनशील मामले के रूप में सामने आई थी। उनके माता-पिता ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है और कथित वीआईपी की पहचान को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं; यह मामला उत्तराखंड में सामाजिक-राजनीतिक रूप से अब भी संवेदनशील बना हुआ है।
कांग्रेस ने विरोध के लिए क्या कदम उठाए हैं?
कांग्रेस ने देहरादून के गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास करने का ऐलान किया है। इसके अलावा पार्टी नेतृत्व की बैठक के बाद आगे के विरोध कार्यक्रमों और अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन की रणनीति तय की जाएगी।
इस नियुक्ति पर BJP की क्या स्थिति है?
स्रोत में BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने आरोप लगाया है कि BJP उत्तराखंड के स्वाभिमान और भावनाओं को चुनौती दे रही है; BJP का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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