15 अक्टूबर 2026
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखा पत्र, दुष्यंत गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग

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अंकिता भंडारी हत्याकांड: राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखा पत्र, दुष्यंत गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग

सारांश

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मु को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर सवाल उठाए — तर्क यह कि यह नियुक्ति अंकिता भंडारी हत्याकांड की सक्रिय सीबीआई जांच को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी कर देती है, क्योंकि राज्यपाल को संवैधानिक उन्मुक्ति प्राप्त होती है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार का अनुरोध किया।
अंकिता भंडारी की हत्या 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में हुई थी; दोषी पुलकित आर्य और दो अन्य आजीवन कारावास काट रहे हैं।
वीआईपी मेहमानों की पहचान को लेकर सीबीआई जांच अभी भी जारी है, जो जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों के बाद शुरू हुई थी।
राहुल गांधी का तर्क है कि अनुच्छेद 74(1) के तहत राष्ट्रपति सरकार से नियुक्ति पर पुनर्विचार करने को कह सकती हैं।
अंकिता के माता-पिता नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं और कथित तौर पर पुलिस हिरासत में लिए गए हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर अंकिता भंडारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। उनका तर्क है कि इस नियुक्ति से सीबीआई जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि 19 वर्षीया अंकिता भंडारी की हत्या 18 सितंबर 2022 को हुई थी। वह ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। उनके नियोक्ता पुलकित आर्य — जो एक भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता के पुत्र हैं — ने कथित तौर पर उन पर वीआईपी मेहमानों को 'स्पेशल सर्विस' देने का दबाव बनाया। अंकिता ने इनकार किया। पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को हत्या का दोषी पाया गया और तीनों अब आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में एक केंद्रीय सवाल चार वर्षों से अनुत्तरित है — वे वीआईपी मेहमान कौन थे? जनवरी 2026 में उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने इस सवाल की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी, जो अभी भी जारी है।

राहुल गांधी की आपत्ति का सार

राहुल गांधी ने पत्र में लिखा, 'अंकिता के परिवार सहित कई लोग आरोप लगाते हैं कि दुष्यंत गौतम इस अपराध से जुड़े हैं। वीआईपी कौन थे, यह पता लगाने के लिए सीबीआई जांच जारी है, लेकिन बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संविधान के अंतर्गत राज्यपाल पद पर रहते हुए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं की जा सकती।

उनके अनुसार, 'दुष्यंत गौतम की नियुक्ति उन्हें सीबीआई की पहुँच से बाहर कर देती है। एक ऐसी जांच जिसका परिणाम कभी अभियोजन में नहीं हो सकता, वह केवल नाम की जांच है।'

संवैधानिक तर्क

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को याद दिलाया कि राज्यपाल अपने राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जैसे राष्ट्रपति भारत सरकार की संवैधानिक प्रमुख हैं। उन्होंने अनुच्छेद 74(1) का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति को दीर्घकालिक परंपरा के अनुसार सरकार को सलाह पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करने का अधिकार प्राप्त है।

साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नियुक्ति सुझाकर महिला सुरक्षा के प्रति 'घोर उपेक्षा' का प्रदर्शन किया है।

परिवार का विरोध और पुलिस कार्रवाई

राहुल गांधी ने पत्र में उल्लेख किया कि अंकिता के माता-पिता, जो अभी भी न्याय के लिए संघर्षरत हैं, इस नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं और उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि जब तक सीबीआई अपनी जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक दुष्यंत गौतम को पदभार ग्रहण न करने दिया जाए।

आगे क्या

यह पत्र ऐसे समय में आया है जब अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की गति पर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दुष्यंत गौतम की नियुक्ति और उस पर लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद के और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उनके राज्यपाल रहते अभियोजन संभव नहीं — यह कानूनी तथ्य है, न महज़ विपक्षी दावा। असली चिंता यह है कि चार साल बाद भी वीआईपी मेहमानों की पहचान सार्वजनिक नहीं हुई — और यह नियुक्ति उस गुत्थी को और उलझा सकती है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र क्यों लिखा?
राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सक्रिय सीबीआई जांच का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से दुष्यंत गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। उनका तर्क है कि राज्यपाल को संवैधानिक उन्मुक्ति मिलने से जांच व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो सकती है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?
19 वर्षीया अंकिता भंडारी की हत्या 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में हुई थी, जहाँ वे रिसेप्शनिस्ट थीं। नियोक्ता पुलकित आर्य और दो अन्य को दोषी पाया गया और सभी आजीवन कारावास काट रहे हैं। वीआईपी मेहमानों की पहचान को लेकर सीबीआई जांच अभी भी जारी है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति विवादास्पद क्यों है?
अंकिता भंडारी के परिवार सहित कई लोग कथित तौर पर दुष्यंत गौतम पर इस अपराध से जुड़े होने का आरोप लगाते हैं। राज्यपाल पद पर रहते हुए उनके विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती, जिससे सीबीआई जांच की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
राष्ट्रपति क्या कर सकती हैं?
राहुल गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 74(1) का हवाला दिया, जो राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करने की शक्ति देता है। वे सरकार से नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक गौतम को पदभार न दिलाने का आग्रह कर सकती हैं।
अंकिता भंडारी के परिवार की स्थिति क्या है?
अंकिता के माता-पिता दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं और कथित तौर पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से उन्हें न्याय दिलाने और राज्यपाल पद की गरिमा की रक्षा करने का अनुरोध किया है।
राष्ट्र प्रेस
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