ईसीआई नोटिस पर कांग्रेस का पलटवार: 'विपक्ष को डराने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग'

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ईसीआई नोटिस पर कांग्रेस का पलटवार: 'विपक्ष को डराने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग'

सारांश

चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को 'आतंकवादी' टिप्पणी पर 24 घंटे में जवाब मांगा। कांग्रेस ने ED-CBI के जरिए विपक्ष को डराने का आरोप लगाया। सपा ने भी आयोग पर पक्षपात का इल्जाम लगाया।

Key Takeaways

  • भारतीय चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 23 अप्रैल को 'आतंकवादी' टिप्पणी पर 24 घंटे में जवाब देने का नोटिस भेजा।
  • विवाद 22 अप्रैल को चेन्नई में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी के संदर्भ में कथित बयान से उपजा।
  • खड़गे ने सफाई दी कि उनके बयान का 'गलत अर्थ' निकाला गया।
  • कांग्रेस सांसद तारिक अनवर और नेता उदित राज ने ED-CBI के जरिए विपक्ष को डराने का आरोप लगाया।
  • सपा नेता एसटी हसन ने चुनाव आयोग पर 'बंगाल' में भड़काऊ बयानों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए पक्षपात की बात कही।
  • यह मामला चुनावी बयानबाजी की सीमाओं और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर बहस को और तेज करेगा।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल: भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को उनकी कथित 'आतंकवादी' टिप्पणी को लेकर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने गुरुवार को तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है।

विवाद की जड़: चेन्नई प्रेस कॉन्फ्रेंस

यह पूरा विवाद मंगलवार, 22 अप्रैल को चेन्नई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से उपजा। वहां खड़गे ने एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में 'आतंकवादी' शब्द का प्रयोग किया। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनके बयान का 'गलत अर्थ' निकाला गया।

बुधवार, 23 अप्रैल को ईसीआई ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खड़गे से 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया। आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का संभावित उल्लंघन माना।

कांग्रेस का पलटवार: एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "खड़गे ने कल ही अपनी सफाई दे दी थी। उनका मतलब वह नहीं था जो दिखाया जा रहा है। पीएम मोदी जिस तरह ईडी, सीबीआई और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे विपक्ष को डराने का काम हो रहा है।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राज ने इस नोटिस को 'मनुवादी मानसिकता' से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समुदाय से आते हैं और देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष हैं — यह बात भाजपा को बर्दाश्त नहीं हो रही।

उदित राज ने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए कहा, "उन्हें तो जेल भी जाना पड़ा। इन्होंने अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष को बदनाम किया, जेल भिजवाया और जिंदगी तबाह की। यह नोटिस चुनाव आयोग ने नहीं, भाजपा ने भेजा है — अब इन दोनों में कोई फर्क नहीं।"

सपा का रुख: आयोग पर पक्षपात का आरोप

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने संयमित रुख अपनाते हुए कहा कि किसी को भी अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, चाहे वह किसी की नीतियों से असहमत ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पर निजी टिप्पणी उचित नहीं है।

वहीं सपा नेता एसटी हसन ने चुनाव आयोग पर चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "बंगाल में जिन लोगों ने खुलेआम जहर उगला, उनके खिलाफ आज तक कोई नोटिस नहीं आया। खड़गे ने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा, उन्होंने कहा कि वे आतंकवादी की तरह बर्ताव करते हैं — इसमें चौंकाने वाला कुछ नहीं।"

गहरा संदर्भ: चुनावी मौसम में विपक्ष पर कसता शिकंजा

गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भी राज्यों में चुनावी सरगर्मी बनी हुई है और विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर बहस थमी नहीं है। ईसीआई की इस कार्रवाई को विपक्ष ने 'चयनात्मक न्याय' का नाम दिया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि अतीत में भाजपा नेताओं के विवादित बयानों पर आयोग की प्रतिक्रिया की गति और तीव्रता को लेकर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है। इस बार खड़गे को मिले नोटिस ने उस बहस को फिर से हवा दे दी है।

आने वाले दिनों में खड़गे का आयोग को दिया जवाब और उस पर ईसीआई की अगली कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मामला चुनावी बयानबाजी की सीमाओं और संस्थागत निष्पक्षता की बहस को और तेज करेगा।

Point of View

बल्कि यह उस बड़े सवाल को फिर खड़ा करता है कि क्या संवैधानिक संस्थाएं सत्तारूढ़ दल के दबाव से मुक्त हैं। विपक्ष का 'चयनात्मक न्याय' वाला तर्क तब और बलवान होता है जब बंगाल जैसे राज्यों में भड़काऊ बयानों पर आयोग की चुप्पी सार्वजनिक रिकॉर्ड पर दर्ज है। खड़गे का बयान भले ही विवादास्पद हो, लेकिन असली मुद्दा यह है कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए संस्थाओं का औजार बनाया जाना खुद लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

चुनाव आयोग ने खड़गे को नोटिस क्यों भेजा?
भारतीय चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 'आतंकवादी' शब्द के कथित इस्तेमाल पर नोटिस भेजा। आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का संभावित उल्लंघन मानते हुए 24 घंटे में जवाब मांगा।
खड़गे ने 'आतंकवादी' शब्द का इस्तेमाल कब और कहां किया?
खड़गे ने यह शब्द मंगलवार, 22 अप्रैल को चेन्नई में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा। बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया।
कांग्रेस ने ईसीआई के नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस ने इस नोटिस को विपक्ष को डराने की कोशिश बताया और आरोप लगाया कि ED, CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। वरिष्ठ नेता उदित राज ने इसे भाजपा की 'मनुवादी मानसिकता' से जोड़ा।
समाजवादी पार्टी ने इस मामले में क्या कहा?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि किसी को भी अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वहीं सपा नेता एसटी हसन ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में भड़काऊ बयानों पर कभी नोटिस नहीं भेजा गया।
क्या चुनाव आयोग पर पहले भी पक्षपात के आरोप लगे हैं?
हां, विपक्षी दल पहले भी चुनाव आयोग पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते रहे हैं। इस बार खड़गे को मिले नोटिस ने उस बहस को फिर से तेज कर दिया है, खासकर जब भाजपा नेताओं के कई विवादित बयानों पर आयोग की प्रतिक्रिया धीमी रही है।
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