लखनऊ PMLA कोर्ट ने LIC चेक धोखाधड़ी मामले में समीर जोशी को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने LIC के चेक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दूसरे आरोपी समीर जोशी को दोषी ठहराने में सफलता हासिल की है। लखनऊ की PMLA स्पेशल कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को अपने फैसले में जोशी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 3 और धारा 4 के तहत दोषी पाया।
सजा और जुर्माना
स्पेशल कोर्ट ने समीर जोशी को तीन साल और छह महीने की सख्त कैद की सजा सुनाई तथा ₹20,000 का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त छह महीने की जेल भुगतनी होगी। साथ ही, कोर्ट ने PMLA, 2002 की धारा 8(5) के तहत अपराध से प्राप्त ₹14,000 के बदले अटैच की गई पैतृक संपत्ति को केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त करने का निर्देश भी दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर लगभग ₹54.23 लाख के 29 फर्जी LIC चेक बनाने और नकद कराने से संबंधित धोखाधड़ी के लिए दर्ज की गई थी। जांच में पता चला कि जोशी को यह रकम अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से प्राप्त हुई थी, जिसे बाद में कारोबार सहित अन्य कार्यों में खर्च कर दिया गया या उपयोग में लाया गया।
संपत्ति अटैचमेंट की प्रक्रिया
जांच के दौरान ईडी ने ₹14,000 की वह राशि चिह्नित की, जो अपराध से प्राप्त मानी गई और जोशी से संबंधित थी। इसके बाद 17 मार्च 2018 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर नंबर 03/2018 के तहत उनकी पैतृक संपत्ति के मूल्य के बराबर रकम जब्त की गई। PMLA की एडजूडिकेटिंग अथॉरिटी ने 6 सितंबर 2018 के आदेश में 'ओरिजिनल कंप्लेंट नंबर 924/2018' के अंतर्गत इस अटैचमेंट की पुष्टि की।
CBI कोर्ट का पहले का फैसला
गौरतलब है कि इस मामले में CBI कोर्ट मूल अपराध के लिए समीर जोशी को पहले ही दोषी ठहरा चुकी है। 7 अगस्त को सुनाए गए फैसले में CBI कोर्ट ने उन्हें एक साल और नौ महीने की जेल एवं जुर्माने की सजा दी थी। यह PMLA कोर्ट की सजा उससे अतिरिक्त है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों के तहत है।
आगे की दिशा
यह मामला ईडी की उस व्यापक मुहिम का हिस्सा है जिसमें सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं से जुड़ी धोखाधड़ी और अपराध से प्राप्त धन की लॉन्ड्रिंग पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। इस दोहरी सजा से यह संकेत मिलता है कि मूल अपराध के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में भी अलग से कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।