कोकीन तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में दो दोषियों को 3-3 साल की सजा, ईडी की बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-1 ने 1.230 किलोग्राम कोकीन की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह को दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें 3-3 साल की कठोर सजा सुनाई गई है। एसएएस नगर (मोहाली) की स्पेशल कोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को सुनाए गए इस फैसले में दोनों पर ₹5,000-5,000 का जुर्माना भी लगाया।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जाँच पंजाब पुलिस द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो 1.230 किलोग्राम कोकीन की बरामदगी से संबंधित थी। दोनों आरोपियों को पहले एनडीपीएस अधिनियम की धारा 22 और धारा 29 के तहत संबंधित अपराधों में भी दोषी ठहराया जा चुका था।
मुख्य घटनाक्रम और अदालत का निर्णय
स्पेशल कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में दोनों को दोषी माना, जिसके लिए धारा 4 के अंतर्गत सजा का प्रावधान है। पीएमएलए जाँच में ₹6 लाख और ₹4 लाख — कुल ₹10 लाख — के दो चेक सामने आए, जो प्रतिबंधित ड्रग्स के लेन-देन से जुड़े थे।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित ड्रग्स और उक्त चेक दोनों ही पीएमएलए के तहत 'संपत्ति' की परिभाषा में आते हैं और 'अपराध से हुई कमाई' माने जाते हैं, क्योंकि ये संबंधित आपराधिक गतिविधि का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। यह व्याख्या भविष्य के ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर स्थापित करती है।
ईडी की व्यापक रणनीति
ईडी के अनुसार, यह सजा केवल नशीले पदार्थों की तस्करी को नहीं, बल्कि उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क को भी निशाना बनाने की उसकी रणनीति का हिस्सा है। एजेंसी का कहना है कि अवैध ड्रग तस्करी की आर्थिक नींव पर प्रहार किए बिना इस समस्या को जड़ से नहीं उखाड़ा जा सकता।
गौरतलब है कि इसी दौरान ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मेसर्स अक्षता मिनरल्स और अन्य के विरुद्ध 2 सितंबर को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी करते हुए लगभग ₹2.10 करोड़ की अचल संपत्ति (रेजिडेंशियल प्लॉट) को अटैच किया। यह जाँच अक्टूबर 2013 में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
आम जनता और कानूनी व्यवस्था पर असर
यह फैसला इस लिहाज़ से अहम है कि इसमें अदालत ने ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच की कड़ी को कानूनी रूप से स्थापित किया है। पंजाब जैसे राज्यों में, जहाँ नशे की समस्या गंभीर चिंता का विषय रही है, ऐसी सजाएँ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक सशक्त संदेश हैं।
आगे क्या
ईडी के अनुसार, ड्रग तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जाँच जारी रहेगी और ऐसे मामलों में दोषसिद्धि की दर बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमएलए के तहत 'अपराध से हुई कमाई' की व्यापक परिभाषा आने वाले समय में और अधिक मामलों में लागू की जाएगी।