चेन्नई के पास तिरुनीर्मलाई झील में चार स्कूली बच्चे डूबे, दो लड़के-दो लड़कियाँ शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई के क्रोमपेट इलाके से शनिवार, 4 अक्टूबर 2026 को लापता हुए चार स्कूली बच्चे रविवार को तिरुनीर्मलाई पेरिया एरी झील में मृत पाए गए। पुलिस के अनुसार, सभी चारों बच्चे लक्ष्मीपुरम, कृष्णा स्ट्रीट के निवासी थे और उन्हें आखिरी बार शनिवार दोपहर अपने घर के पास एक साथ खेलते देखा गया था।
मृतकों की पहचान
पुलिस ने चारों बच्चों की पहचान के. देवदर्शन (12 वर्ष), डी. युवनेश (10 वर्ष), पूजा (13 वर्ष) और खुशी (13 वर्ष) के रूप में की है। देवदर्शन एक सरकारी स्कूल में कक्षा 7 का छात्र था, जबकि पूजा और खुशी उसी सरकारी स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ती थीं। युवनेश एक निजी विद्यालय में कक्षा 6 का छात्र था।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के बयान के अनुसार, बच्चे शनिवार दोपहर खेलते-खेलते मोहल्ले से निकल गए और रात तक घर नहीं लौटे। परिजनों ने पहले रिश्तेदारों और दोस्तों से संपर्क किया, फिर बच्चों की तस्वीरें स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुपों में साझा कीं और मदद की गुहार लगाई। देर रात कोई सुराग न मिलने पर दोनों लड़कों के परिवारों ने क्रोमपेट पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने तांबरम, एग्मोर और चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ केलंबक्कम बस टर्मिनस के कर्मचारियों को सतर्क किया और निर्देश दिया कि वे यह जाँचें कि कहीं बच्चे इलाके से बाहर तो नहीं गए।
शव बरामदगी
रविवार को तिरुनीर्मलाई पेरिया एरी झील पर आए कुछ स्थानीय लोगों की नज़र पानी में तैरते चार शवों पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया। पुलिस और तमिलनाडु अग्निशमन एवं बचाव सेवा के जवान मौके पर पहुँचे और शवों को झील से बाहर निकाला। किनारे पर पहुँचने के बाद परिवार के सदस्यों ने चारों बच्चों की शिनाख़्त की। शवों को पोस्टमार्टम के लिए तांबरम ज़िला सरकारी अस्पताल के शवगृह में भेज दिया गया।
जाँच जारी
जाँचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि बच्चे झील तक कैसे पहुँचे और वे किन परिस्थितियों में पानी में उतरे। पुलिस को कथित तौर पर संदेह है कि बच्चे झील के किनारे कीचड़ में फँस गए और डूब गए, लेकिन मौत के सटीक कारण और क्रम की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
आम जनता पर असर
यह दुखद घटना चेन्नई और आसपास के इलाकों में खुली झीलों तथा जलाशयों के पास बच्चों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठाती है। गौरतलब है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऐसी जलसंरचनाओं के इर्द-गिर्द अक्सर कोई सुरक्षा-घेरा या चेतावनी-संकेत नहीं होते। परिवारों का शोक और समुदाय का दर्द इस बात की माँग उठाता है कि प्रशासन ऐसे जलाशयों के पास बाड़बंदी और निगरानी को प्राथमिकता दे।