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क्या 'गहरी सांस' लेना आंतरिक शांति की कुंजी है? जानें इसके फायदे

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क्या 'गहरी सांस' लेना आंतरिक शांति की कुंजी है? जानें इसके फायदे

सारांश

क्या आप जानते हैं कि गहरी सांस लेना आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है? यह छोटी आदत तनाव को कम करती है और जीवन में शांति लाती है। जानें कैसे गहरी सांस आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

मुख्य बातें

तनाव में कमी पाचन का सुधार ऊर्जा का वृद्धि भावनात्मक संतुलन हृदय स्वास्थ्य में सुधार

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वस्थ शरीर और शांत मन के साथ जीवन को सुखद बनाना संभव है, परंतु तनाव और व्यस्तता में छोटी समस्याएं भी बड़ी चुनौती बन जाती हैं। आयुर्वेद ऐसी स्थितियों में छोटी-छोटी आदतों को अपनाने की सलाह देता है, जिसमें सबसे सरल और प्रभावी तरीकों में से एक है गहरी सांस लेना। आयुर्वेद इसे प्राणायाम का मूल आधार मानता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, प्रतिदिन कुछ मिनट गहरी सांस लेने से तनाव में कमी आती है, मन शांत रहता है और पाचन में सुधार होता है। इसके साथ ही, शरीर को अनगिनत लाभ भी प्राप्त होते हैं। गहरी सांस को दीर्घ श्वास या डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग भी कहा जाता है। यह शरीर में ऊर्जा को बढ़ाती है।

गहरी सांस, प्राण (जीवन ऊर्जा) को नियंत्रित करते हुए शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। रोजाना कुछ मिनट गहरी सांस लेने से तीनों दोष (वात, पित्त, कफ) संतुलित होते हैं, तनाव कम होता है और जीवन में शांति के साथ ऊर्जा भी बढ़ती है।

गहरी सांस लेना अत्यंत आवश्यक है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, आजकल अधिकांश लोग छाती से उथली सांस लेते हैं, जिससे तनाव, चिंता और असंतुलन उत्पन्न होता है। आयुर्वेद के अनुसार, उथली सांस वात दोष को बढ़ाती है और मन को बेचैन रखती है। गहरी सांस (पेट तक) लेने से पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर को 'आराम और पुनर्स्थापना' मोड में ले जाता है। यह प्राण को बेहतर प्रवाह देता है, ऑक्सीजन बढ़ाता है और पूरे शरीर को पोषण प्रदान करता है।

गहरी सांस लेने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। इससे तनाव और चिंता कम होती है। कोर्टिसोल हार्मोन घटता है, मन शांत होता है और भावनात्मक संतुलन आता है। इसके अलावा, पाचन क्रिया में सुधार होता है। डायफ्राम की मसाज से अग्नि तेज होती है। कब्ज, गैस और अपच दूर होती है। इसके अभ्यास से इम्युनिटी मजबूत होती है और बेहतर ऑक्सीजनेशन से पूरा शरीर डिटॉक्स होता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

यही नहीं, इससे हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है। हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहते हैं। अनिद्रा की समस्या से राहत मिलती है और थकान कम होती है। इससे फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि होती है और सांस संबंधी समस्याएं कम होती हैं। गहरी सांस एकाग्रता को बढ़ाती है, क्रोध को नियंत्रित करती है और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है। आयुर्वेद में इसे वात दोष को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है, जो आज के तनावपूर्ण जीवन में अत्यधिक आवश्यक है।

सुबह उठकर या दिन में 5-10 मिनट बैठकर, नाक से धीरे पेट फुलाकर सांस अंदर लें (4-6 सेकंड), 2-4 सेकंड रोकें, फिर धीरे बाहर छोड़ें (6-8 सेकंड)। इसे 10-20 बार दोहराएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि गहरी सांस लेना एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी तकनीक है, जिसका उपयोग सभी को अपने जीवन में करना चाहिए। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गहरी सांस लेने से क्या लाभ होते हैं?
गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है, पाचन में सुधार होता है और इम्युनिटी मजबूत होती है।
गहरी सांस लेने का सही तरीका क्या है?
सुबह उठकर या दिन में 5-10 मिनट नाक से धीरे पेट फुलाकर सांस अंदर लें, 2-4 सेकंड रोकें और फिर बाहर छोड़ें।
राष्ट्र प्रेस
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