गर्मियों में बाबा महाकाल की पूजा विधि में परिवर्तन, दो महीने तक अर्पित होगा शिव जलधारा

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गर्मियों में बाबा महाकाल की पूजा विधि में परिवर्तन, दो महीने तक अर्पित होगा शिव जलधारा

सारांश

उज्जैन में बाबा महाकाल की पूजा विधि में गर्मियों के मौसम के आगमन के साथ परिवर्तन किया गया है। विशेष रूप से, दो महीनों तक बाबा को ठंडा जल अर्पित किया जाएगा, जिससे उन्हें तपिश से राहत मिलेगी। यह प्राचीन परंपरा भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है।

Key Takeaways

  • गर्मियों में बाबा महाकाल की पूजा विधि में बदलाव होता है।
  • दो महीने तक शिव जलधारा अर्पित की जाती है।
  • ठंडा जल अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है।
  • बाबा के तापमान को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
  • भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है यह अनुष्ठान।

उज्जैन, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन को बाबा महाकाल की पवित्र भूमि माना जाता है, जहां केवल दर्शन से ही अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और संकट का समय भी सुखद समय में बदल जाता है। भक्तों की यह आस्था न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशों से भी यहां आने के लिए प्रेरित करती है। गर्मियों का मौसम आते ही बाबा की पूजा विधि में विशेष परिवर्तन किया गया है। बाबा की गर्मी से रक्षा के लिए मंदिर में विशेष उपाय किए जा रहे हैं।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि बाबा को गर्मी से राहत देने के लिए प्राचीन परंपरा का पालन शुरू होने जा रहा है, जिसमें विभिन्न नदियों का पवित्र जल मिलाकर बाबा को अर्पित किया जाएगा।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से संवाद करते हुए कहा, "यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसमें बाबा को गर्मियों की तपिश से बचाने के लिए और उन्हें आनंदित करने के लिए ठंडा जल अर्पित किया जा रहा है। बाबा ने अपने कंठ में हलाहल ग्रहण किया है, जिससे उनका तापमान गर्म रहता है। इसलिए पुजारी मिलकर ऐसी व्यवस्था करते हैं कि बाबा पर निरंतर जल की धारा बहती रहे।"

उन्होंने आगे कहा कि बाबा के ताप को कम करने के लिए ठंडी वस्तुओं का भोग अर्पित किया जाता है और ठंडे वस्त्रों का लेपन भी किया जाता है, ताकि भगवान को हमेशा शीतलता और सुख मिल सके।

पुजारी ने बताया कि वैशाख और ज्येष्ठ के महीनों में तापमान सबसे अधिक होता है। ऐसे में विशेष रूप से बाबा को शिव जलधारा अर्पित की जाती है। हालांकि, रोजाना बाबा को जलधारा अर्पित की जाती है, लेकिन यह शिव जलधारा विशेष महत्व रखती है। इसमें दो महीनों तक बाबा पर मटके की जलधारा अर्पित की जाती है, जिसमें मंदिर के तीर्थ कुंड का जल होता है। तीर्थ कुंड में पहले से ही सभी पवित्र नदियों का जल समाहित है। इस प्रकार दो महीनों तक मिट्टी के मटके के माध्यम से बाबा को ठंडक का अनुभव कराया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से कई यज्ञों का फल मिलता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

Point of View

जो भक्तों की आस्था और परंपराओं का प्रतीक है। गर्मियों में बाबा को ठंडा जल अर्पित करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्तों की भक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

गर्मियों में बाबा महाकाल की पूजा विधि में क्या बदलाव होते हैं?
गर्मियों में बाबा महाकाल को ठंडा जल अर्पित किया जाता है, ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।
क्या शिव जलधारा का विशेष महत्व है?
हां, शिव जलधारा विशेष रूप से दो महीनों तक अर्पित की जाती है, जिसमें मंदिर के तीर्थ कुंड का जल होता है।
बाबा महाकाल की पूजा के लिए भक्त किस प्रकार आते हैं?
भक्त देश-विदेश से बाबा महाकाल के दर्शन और पूजा के लिए आते हैं।
बाबा का तापमान क्यों गर्म रहता है?
बाबा ने अपने कंठ में हलाहल ग्रहण किया है, जिससे उनका तापमान गर्म रहता है।
गर्मियों में बाबा को ठंडी वस्तुएं क्यों अर्पित की जाती हैं?
बाबा को ठंडी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं ताकि उन्हें हमेशा शीतलता और सुख प्राप्त हो।
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