जनरल धीरज सेठ ने एशियाई खेल 2026 के 20 पदक विजेता सैन्य खिलाड़ियों को किया सम्मानित
सारांश
मुख्य बातें
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एशियाई खेल 2026 में पदक जीतने वाले सेना के खिलाड़ियों को औपचारिक रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, कठोर अनुशासन और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। भारतीय सेना का अगला लक्ष्य इन खिलाड़ियों को लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए तैयार करना है।
एशियाई खेलों में सेना का शानदार प्रदर्शन
भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने एशियाई खेल 2026 में कुल 20 पदक जीते — जिनमें 6 स्वर्ण, 8 रजत और 6 कांस्य पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि सेना के खिलाड़ियों ने इन खेलों में भारत के कुल 85 पदकों में लगभग 24 प्रतिशत का योगदान दिया। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन किसी एकल संस्था द्वारा किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत के पदकों में इतना बड़ा हिस्सा जोड़ने के मामले में विशेष महत्व रखता है।
व्यक्तिगत उपलब्धियाँ और नए कीर्तिमान
नायब सूबेदार नीरू ढांडा ने इन खेलों में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर असाधारण प्रदर्शन किया। वह महिलाओं की ट्रैप निशानेबाजी में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं — एक ऐतिहासिक उपलब्धि जिसने भारतीय खेल जगत में नया अध्याय लिखा।
एथलेटिक्स में नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने तीन व्यक्तिगत पदक जीते, जबकि हवलदार सावन बरवाल ने मैराथन में रजत पदक हासिल किया। सेना के अनुसार, बरवाल की इस उपलब्धि के साथ मैराथन में भारत का पदक जीतने का 44 साल का लंबा इंतजार समाप्त हुआ। हवलदार अंकुश ने स्वर्ण पदक जीतकर सेना की प्रतिभा-पहचान और प्रशिक्षण व्यवस्था की सफलता को रेखांकित किया।
राष्ट्रमंडल खेलों में भी दमदार प्रदर्शन
सेना के खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन केवल एशियाई खेलों तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2026 में ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने 8 स्वर्ण, 7 रजत और 1 कांस्य सहित कुल 16 पदक जीते। यह भारत के राष्ट्रमंडल खेलों के कुल पदकों का 41 प्रतिशत था। दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन, सेना की खेल प्रशिक्षण व्यवस्था की मज़बूती का प्रमाण है।
मिशन ओलंपिक: 2028 की तैयारी
सेना की मिशन ओलंपिक शाखा इस सफलता की रीढ़ रही है। इस व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को विशेषज्ञ प्रशिक्षक, खेल विज्ञान, आधुनिक तकनीक, संतुलित पोषण, चोट प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के अवसर मिलते हैं। अब सेना का सारा ध्यान लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों पर केंद्रित हो गया है, जहाँ व्यक्तिगत ज़रूरतों के अनुसार वैज्ञानिक प्रशिक्षण और भविष्य के पदक विजेताओं की नई पीढ़ी तैयार करने पर ज़ोर दिया जाएगा।
जनरल धीरज सेठ ने विश्वास जताया कि सेना के खिलाड़ी अपने दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर आगे भी देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे। भारत को विश्व की अग्रणी खेल शक्तियों में शामिल करने की दिशा में भारतीय सेना एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।