राष्ट्रमंडल खेल 2026: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने ग्लासगो के 16 पदक विजेता सेना खिलाड़ियों को सम्मानित किया
सारांश
मुख्य बातें
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय सेना के खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित किया। सेना के 15 खिलाड़ियों ने ग्लासगो में कुल 16 पदक — 8 स्वर्ण, 7 रजत और 1 कांस्य — जीतकर भारत के कुल 39 पदकों में से 41% से अधिक योगदान दिया।
मुख्य घटनाक्रम
सेना प्रमुख ने खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनके समर्पण, अनुशासन तथा निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। जनरल सेठ ने कहा कि 'खेलों में उत्कृष्टता हासिल करना भारतीय सेना की कार्य संस्कृति और मूल भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।' उन्होंने खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
स्वर्ण पदक विजेता: कौन-कौन चमके
मुक्केबाजी में सेना का प्रदर्शन सर्वाधिक शानदार रहा — अकेले इस खेल में 6 स्वर्ण और 2 रजत पदक जीते गए। नायब सूबेदार प्रीति ने महिलाओं के 54 किलोग्राम मुक्केबाजी वर्ग में, नायब सूबेदार जैस्मिन लांबोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग में, हवलदार साक्षी ने 51 किलोग्राम महिला वर्ग में, हवलदार अरुंधति चौधरी ने 70 किलोग्राम महिला वर्ग में, हवलदार सचिन सिवाच ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में और हवलदार अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम मुक्केबाजी वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। इसके अतिरिक्त, हवलदार हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम जूडो वर्ग में और सूबेदार सोमन राणा ने पुरुषों के पैरा शॉटपुट एफ-57 वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
रजत और कांस्य पदक विजेता
लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीता। नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल कर एथलेटिक्स में इतिहास रचा। नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने पुरुषों की ऊँची कूद में रजत, हवलदार वल्लुरी अजया बाबू ने भारोत्तोलन में रजत, हवलदार जडुमणि सिंह ने मुक्केबाजी में रजत, लांस नायक शुभम जुयाल ने पैरा शॉटपुट में रजत और सूबेदार नरेंद्र बरवाल ने पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग की मुक्केबाजी में रजत पदक जीता।
सेना की खेल नीति और व्यापक संदर्भ
सेना के अनुसार, ग्लासगो में यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना खेल प्रतिभाओं की पहचान, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और उच्चतम स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर निरंतर जोर दे रही है। गौरतलब है कि भारतीय सेना के खिलाड़ी ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार देश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है और सेना के कई खिलाड़ी संभावित दावेदारों में शामिल हैं।
आगे की राह
सेना प्रमुख जनरल सेठ ने संकेत दिया कि इन खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए और अधिक संसाधन व प्रशिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी। ग्लासगो की इस सफलता के बाद सेना के खेल कार्यक्रम को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।