जनेऊ विवाद पर गिरिराज सिंह का बड़ा हमला: बंगाल से ममता और कर्नाटक से कांग्रेस की विदाई तय

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जनेऊ विवाद पर गिरिराज सिंह का बड़ा हमला: बंगाल से ममता और कर्नाटक से कांग्रेस की विदाई तय

सारांश

कर्नाटक CET में जनेऊ उतरवाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला। कहा — बंगाल से ममता और कर्नाटक से कांग्रेस की विदाई तय है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन बताया।

Key Takeaways

  • केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 25 अप्रैल 2025 को बेगूसराय में कर्नाटक CET जनेऊ विवाद पर कांग्रेस को घेरा।
  • कर्नाटक CET 2025 के दौरान कुछ परीक्षार्थियों से जबरन जनेऊ उतरवाया गया, जिसने राजनीतिक विवाद खड़ा किया।
  • गिरिराज सिंह ने कहा — बंगाल से ममता और कर्नाटक से कांग्रेस की विदाई तय है।
  • राहुल गांधी पर जनेऊ को लेकर दोहरे चरित्र का आरोप — चुनाव में पहना, सरकार में उतरवाया।
  • भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने घटना को मानवाधिकार और संविधान का उल्लंघन बताया, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
  • ममता बनर्जी के दो मंत्री जेल जा चुके हैं — गिरिराज सिंह ने बंगाल में भाजपा सरकार बनने का दावा किया।

बेगूसराय, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान कुछ परीक्षार्थियों को जबरन जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किए जाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने बेगूसराय में मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट कहा कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार की विदाई निश्चित है, ठीक उसी तरह कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार के दिन गिने-चुने रह गए हैं।

जनेऊ विवाद: क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक में आयोजित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET 2025) के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर हिंदू परीक्षार्थियों को उनके धार्मिक प्रतीक जनेऊ उतारने के लिए कहा गया। इस घटना ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया और भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस सरकार की हिंदू-विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया।

गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी को भी घेरा। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी ने स्वयं चुनावी अभियानों के दौरान जनेऊ धारण कर अपनी हिंदू पहचान प्रदर्शित की थी — लेकिन उनकी ही पार्टी की सरकार अब परीक्षार्थियों से यही जनेऊ उतरवा रही है। उन्होंने इसे घोर विरोधाभास और दोहरा चरित्र करार दिया।

गिरिराज सिंह का कांग्रेस और ममता पर हमला

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की सरकार सत्ता से बाहर होने वाली है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी के दो मंत्री पहले ही जेल जा चुके हैं और उनके सारे पापों का घड़ा जल्द फूटेगा। बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी।

उन्होंने कर्नाटक के संदर्भ में कहा कि जिस तरह जनता ने बंगाल में बदलाव का मन बना लिया है, उसी तरह कर्नाटक की जनता भी कांग्रेस को सत्ता से बाहर करेगी। धर्म और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाली सरकारें जनता का विश्वास नहीं जीत सकतीं।

तेजस्वी यादव और लालू पर गिरिराज का पलटवार

राजद नेता तेजस्वी यादव के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि भाजपा गंगा की तरह विशाल और समुद्र की तरह गहरी है। उन्होंने कहा कि अगर लालू यादव की पाठशाला इतनी उत्तम होती तो सम्राट चौधरी उसे छोड़कर क्यों जाते? लालू यादव की राजनीति में हमेशा परिवारवाद को प्राथमिकता दी गई, जो इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।

आतंकवाद पर गिरिराज का विवादित बयान

आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में जब भी आतंकवादी पकड़े जाते हैं तो वे अधिकतर एक विशेष समुदाय से होते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने कभी आतंकवाद का पोषण नहीं किया और जैसा करोगे वैसा ही पाओगे।

यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा बता सकता है। गौरतलब है कि ऐसे बयान अक्सर चुनावी माहौल में अधिक उभरते हैं।

तेजस्वी सूर्या का संवैधानिक तर्क

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक CET जनेऊ विवाद पर कहा कि यदि कोई परीक्षार्थी अपनी शर्ट के भीतर कोई धार्मिक प्रतीक धारण किए हुए है और उसे उसे बाहर निकालने के लिए बाध्य किया जाता है, तो यह मानवाधिकारों और निजता के अधिकार दोनों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धर्म और आस्था की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। दोषी परीक्षा अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनसे कड़े सवाल पूछे जाने चाहिए।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक निहितार्थ

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं और कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से कई मोर्चों पर घिरी हुई है। भाजपा इस घटना को हिंदू धार्मिक भावनाओं से जोड़कर चुनावी लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में हिजाब विवाद के बाद यह दूसरा बड़ा धार्मिक प्रतीक विवाद है जो परीक्षा केंद्रों से जुड़ा है। इस बार मामला उलटा है — हिंदू धार्मिक प्रतीक को लेकर आपत्ति उठाई गई है, जो राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।

आने वाले दिनों में कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संभावित कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

Point of View

उनकी ही कर्नाटक सरकार उसे परीक्षा कक्ष में अपमानित करती दिखती है — यह विरोधाभास कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है। गिरिराज सिंह का यह बयान बंगाल चुनाव से ठीक पहले आया है, जो स्पष्ट संकेत है कि भाजपा हिंदू भावनाओं को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यधारा की मीडिया इस घटना को केवल बयानबाज़ी की तरह कवर कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि परीक्षा नियामक संस्थाओं में धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर प्रशिक्षण और नीति की कितनी कमी है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

कर्नाटक CET में जनेऊ विवाद क्या है?
कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET 2025) के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर हिंदू परीक्षार्थियों को उनका धार्मिक प्रतीक जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किया गया। इस घटना ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया और भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार की हिंदू-विरोधी नीति बताया।
गिरिराज सिंह ने कर्नाटक और बंगाल पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जिस तरह बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार की विदाई तय है, उसी तरह कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार जाएगी। उन्होंने राहुल गांधी पर भी जनेऊ को लेकर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया।
तेजस्वी सूर्या ने जनेऊ विवाद पर क्या कहा?
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि परीक्षार्थी से धार्मिक प्रतीक हटवाना मानवाधिकार और निजता के अधिकार दोनों का उल्लंघन है। उन्होंने दोषी परीक्षा अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
क्या बंगाल चुनाव में भाजपा की सरकार बनेगी?
गिरिराज सिंह ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनेगी और ममता बनर्जी के दो मंत्री पहले ही जेल जा चुके हैं। हालांकि यह भाजपा का राजनीतिक दावा है, चुनावी नतीजे ही असली जवाब देंगे।
जनेऊ उतरवाने की घटना संविधान के किस अधिकार का उल्लंघन है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धर्म और आस्था की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। तेजस्वी सूर्या के अनुसार किसी परीक्षार्थी से धार्मिक प्रतीक हटवाना इस अधिकार के साथ-साथ निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) का भी उल्लंघन है।
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