गिरिराज सिंह ने जेएनयू को बताया अर्बन नक्सल का केंद्र
सारांश
Key Takeaways
- जेएनयू में एबीवीपी और वामपंथी समर्थकों के बीच झड़प हुई।
- गिरिराज सिंह ने इसे अर्बन नक्सल का केंद्र कहा।
- राहुल गांधी के नाम पर आयोजित प्रदर्शन पर सवाल उठाए गए।
- छात्रों के अधिकारों और सुरक्षा पर चर्चा जरूरी है।
- राजनीतिक गतिविधियों की जटिलता बढ़ती जा रही है।
नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार की रात एबीवीपी और वामपंथी समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिससे भारी हंगामा उत्पन्न हुआ। दोनों पक्षों के बीच देर तक पत्थरबाजी भी चलती रही। इस घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जेएनयू अब अर्बन नक्सल का केंद्र बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में गिरिराज सिंह ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक ऐसा स्थल बन गया है जहाँ अर्बन नक्सल से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और वाम दलों की सरकारों ने इसे बढ़ावा दिया है।
गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि वहाँ हो रही गतिविधियाँ अर्बन नक्सल से जुड़ी हैं। यह सिर्फ एबीवीपी का मामला नहीं है। वहाँ जितने भी छात्र कम्युनिस्ट विचारधारा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें पीटा जाता है और जो उनकी बात नहीं मानते, उन पर हमला किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के बारे में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही उन पर टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एआई समिट में राहुल गांधी के नाम पर जो शर्टलेस प्रोटेस्ट किया गया, वह देश के खिलाफ था और ऐसे कार्यों को सहन नहीं किया जाएगा।
गिरिराज सिंह ने कहा कि एआई समिट में राहुल गांधी के इशारों पर जो कुछ हुआ, उसकी व्यापक निंदा की जा रही है। लेकिन कांग्रेसी खेमे में इस पर कोई पछतावा नहीं दिखता। उनकी चिंता है कि अगले संसद सत्र में राहुल गांधी कहीं बनियान में शामिल होने न आ जाएं।
उन्होंने सुझाव दिया कि राहुल गांधी के मस्तिष्क का मानचित्रण होना चाहिए। उनके पार्टी के अंदर और बाहर आलोचना की जा रही है, इसलिए उनकी मस्तिष्क मैपिंग होनी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि हिमंता बिस्वा सरमा का कथन सही है।