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सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जबरन वसूली मामले में दी जमानत

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सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जबरन वसूली मामले में दी जमानत

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे को धमकी और जबरन वसूली के मामले में जमानत दे दी है। यह निर्णय हाईकोर्ट के पूर्व के जमानत इनकार के बाद आया है, जिससे उनकी उम्मीदें एक बार फिर जाग गई हैं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे को दी जमानत।
हाईकोर्ट ने पहले जमानत देने से किया था इनकार।
अखिलेश दुबे का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
कई एफआईआर गलत तरीके से दर्ज होने का दावा।
अन्य मामलों में भी जमानत की उम्मीद बढ़ी।

नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को धमकी और जबरन वसूली के मामले में अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत प्रदान की है। इससे पहले हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अखिलेश दुबे के वकील सत्यम द्विवेदी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "दुर्भावना के तहत एक ही दिन में 6 मुकदमे दर्ज किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद जमानत दे दी है। अन्य मामलों में भी जमानत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।"

उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी द्वारा जो शिकायतें दायर की गई थीं, उन्हें कोर्ट ने देखा और उसके बाद ही अपना निर्णय सुनाया। कोर्ट ने यह भी देखा कि अखिलेश दुबे का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। पहली एफआईआर के बाद ही अन्य एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इनमें से कई एफआईआर गलत तरीके से दर्ज की गई हैं।

सत्यम द्विवेदी ने बताया कि इससे पहले हम लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए गए थे, लेकिन जमानत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट ने इस आधार पर जमानत देने से इनकार किया था कि अखिलेश दुबे पर 47 अन्य मामले चल रहे हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि इनमें से कई मामलों की जांच में कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसके बाद कोर्ट ने जमानत दे दी।

पिछले साल अक्टूबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर जिला न्यायालय में अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। जस्टिस संतोष राय ने यह आदेश देते हुए कहा था कि 6 अगस्त, 2025 से जेल में बंद अधिवक्ता के खिलाफ बर्रा थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है, जिसके कारण उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है।

कोर्ट ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, पेशेवर पद का दुरुपयोग करने की आशंका और अभियोजन के गवाहों पर दबाव डालने-धमकाने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमानत आवेदन स्वीकार करने का कोई पर्याप्त कारण नहीं दिखता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत देकर उनके खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता पर विचार किया है। यह निर्णय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को दर्शाता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश दुबे को जमानत क्यों मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास न होने और कई एफआईआर गलत तरीके से दर्ज होने के कारण जमानत दी।
पिछले हाईकोर्ट के फैसले में क्या था?
हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया था, क्योंकि अखिलेश पर 47 अन्य मामले चल रहे थे।
इस मामले में अगला कदम क्या होगा?
अब अन्य मामलों में भी जमानत की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से संकेत दिया है।
क्या इस मामले में कोई नया साक्ष्य सामने आया है?
अभी तक कोई नया साक्ष्य सामने नहीं आया है, लेकिन कई मामलों की जांच में कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई है।
जमानत मिलने का यह फैसला क्या मायने रखता है?
यह फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को दर्शाता है, और अधिवक्ता के लिए एक आशा की किरण है।
राष्ट्र प्रेस
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