क्या 'वंदे मातरम' आजादी का मंत्र था, और क्या कांग्रेस ने इसे नजरअंदाज किया?: गिरिराज सिंह
सारांश
Key Takeaways
- गैर सरकारी संस्थानों पर टीएमसी का प्रभाव
- गणतंत्र दिवस का महत्व
- 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक संदर्भ
- राजनीतिक बयानबाजी का असर
- हिंदू सुरक्षा को लेकर चिंताएं
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत आज पूरे उत्साह और गौरव के साथ अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर एक भव्य समारोह का आयोजन हुआ। देशभक्ति के इस उत्सव के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया।
गिरिराज सिंह ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "आज हम 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस पर या देश में कभी भी वंदे मातरम को वह महत्व नहीं दिया जो इसे मिलना चाहिए था। अंग्रेजों से लड़ाई में वीर सैनिकों के लिए वंदे मातरम एक महत्वपूर्ण मंत्र था, लेकिन कांग्रेस ने इसे नजरअंदाज किया, जिसके बारे में देश को जागरूक होना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर सैनिकों के सम्मान में गणतंत्र दिवस की थीम रखी है, जिससे उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि मिल सके जिन्होंने अपना जीवन अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने में समर्पित किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा, "ममता बनर्जी देश की सबसे बड़ी तानाशाह हैं। बंगाल में लोकतंत्र का अभाव है। यदि वहां लोकतंत्र होता, तो सरकारी संस्थान, चाहे पुलिस हो, अधिकारी हों या कर्मचारी, टीएमसी के गुंडों के रक्षक नहीं होते। यदि इस बार पश्चिम बंगाल से टीएमसी को जनता ने नहीं हटाया, तो भविष्य में वहां हिंदू सुरक्षित नहीं रहेंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि वह दिन दूर नहीं जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बना देंगी और वहां से हिंदुओं को बाहर निकाल दिया जाएगा या उनकी हत्या कराई जाएगी। इसीलिए जनता को जागरूक होना चाहिए और ममता सरकार को उखाड़कर फेंक देना चाहिए। भाजपा की सरकार आते ही सबसे पहले हिंदुओं को सुरक्षित किया जाएगा।
महाराष्ट्र में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेताओं के 'हम मुंब्रा को हरा-भरा बनाएंगे' वाले बयान पर गिरिराज सिंह ने कहा, "जो लोग चीजों को हरा-भरा करने की बात करते हैं, उन्हें सही जवाब दिया गया है। जो भी गजवा-ए-हिंद का सपना देखता है, उसे समझ लेना चाहिए कि ऐसे विचार भारत में कभी सफल नहीं हो सकते, चाहे वह ओवैसी की पार्टी हो या कोई अन्य, ये लोग कुछ नहीं कर पाएंगे।"