क्या गोपालजी ने गांव की पगडंडियों से विज्ञान के माध्यम से किसानों को नई दिशा दिखाई?

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क्या गोपालजी ने गांव की पगडंडियों से विज्ञान के माध्यम से किसानों को नई दिशा दिखाई?

सारांश

गांव की पगडंडियों से निकलकर गोपालजी त्रिवेदी ने विज्ञान के माध्यम से किसानों को नई दिशा दिखाई है। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें पद्मश्री सम्मान दिलाया है। जानें कैसे उन्होंने अपने ज्ञान से किसानों की समस्याओं का समाधान किया।

Key Takeaways

  • गोपालजी त्रिवेदी का पद्मश्री सम्मान
  • किसानों के लिए विज्ञान का उपयोग
  • कृषि क्षेत्र में नवाचार
  • ग्रामीण विकास में समर्पण
  • शिक्षा और अनुसंधान का महत्व

मुजफ्फरपुर, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को वर्ष २०२६ के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इस सूची में बिहार की तीन प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इनमें कला के क्षेत्र में भरत सिंह भारती और स्वर्गीय विश्वबंधु, जबकि विज्ञान एवं अभियंत्रण के क्षेत्र में गोपालजी त्रिवेदी को पद्मश्री प्रदान किया गया।

कृषि और मात्स्यिकी के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना चुके गोपालजी त्रिवेदी ने अपने प्रारंभिक जीवन में ही किसानों की समस्याओं पर ध्यान दिया। किसानों के कल्याण के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक वैज्ञानिक बना दिया। गांव की पगडंडियों से निकलकर, गोपालजी ने विज्ञान के माध्यम से किसानों को नई दिशा दिखाई।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के मतलुपुर में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्मे डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का बचपन गांव में बीता और यहीं से उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी हुई। इसके बाद पूसा स्थित उच्च विद्यालय से उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई की।

मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका नामांकन इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए लंगट सिंह कॉलेज में हुआ। प्रारंभ से ही उनकी विज्ञान में रुचि थी, इसलिए उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए विज्ञान विषय का चयन किया। पारिवारिक कारणों से उन्हें कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर घर लौटना पड़ा और किसानी करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मانی। इसके बाद उन्हें पूसा विद्यालय में शिक्षक की नौकरी मिली, तब उन्हें लगा कि अब उनकी मंजिल मिलना आसान है।

उसके बाद, उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय में नामांकन लिया और बीएससी और एमएससी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पीएचडी भी की। तिरहुत कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में उन्हें प्रोफेसर की नौकरी मिली और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गोपालजी पूसा कृषि विश्वविद्यालय समस्तीपुर के कुलपति रह चुके हैं और आधुनिक कृषि तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं। उनका पूरा जीवन ग्रामीण परिवेश में गुजरा है, इसलिए हमेशा से किसानों एवं ग्रामीण लोगों से उनका जुड़ाव बना रहा।

गोपालजी त्रिवेदी जब कुलपति थे तब या जब सेवानिवृत्त हो गए हैं, उसके बाद भी वे ग्रामीण एवं किसानों के कल्याण के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

त्रिवेदी ने एक कृषि वैज्ञानिक और प्रशासक के रूप में कई तकनीक विकसित कीं, जिनसे किसानों की पैदावार बढ़ी और उनकी आमदनी में सुधार हुआ। उन्होंने प्रयोगशाला में होने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाने का काम किया, जिसका लाभ किसानों को हुआ। कहा जाता है कि उनकी रचनात्मक सोच से किसानों को आज भी लाभ मिलता है।

Point of View

बल्कि यह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। किसानों की समस्याओं को समझकर विज्ञान के माध्यम से समाधान प्रदान करना, आज की आवश्यकता है। यह पहल हमारे देश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में मदद कर सकती है।
NationPress
11/02/2026

Frequently Asked Questions

गोपालजी त्रिवेदी को पद्मश्री क्यों मिला?
गोपालजी त्रिवेदी को कृषि और मात्स्यिकी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
गोपालजी त्रिवेदी का शिक्षा का सफर कैसा रहा?
गोपालजी ने अपने गांव में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे की पढ़ाई के लिए विज्ञान का चयन किया।
क्या गोपालजी केवल शिक्षक थे?
नहीं, गोपालजी एक प्रख्यात वैज्ञानिक, प्रोफेसर और प्रशासक भी रहे हैं।
गोपालजी ने किसानों के लिए क्या तकनीकें विकसित कीं?
उन्होंने विभिन्न कृषि तकनीकें विकसित कीं, जिनसे किसानों की पैदावार और आमदनी में सुधार हुआ।
गोपालजी का योगदान किस प्रकार का है?
गोपालजी ने विज्ञान के माध्यम से किसानों को नई दिशा दिखाई और उनकी समस्याओं का समाधान किया।
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