मिशन शक्ति: गोरखपुर में 12वीं की छात्राएं बनीं एक दिन की अधिकारी, SSP कार्यालय में सुनीं दर्जनों फरियादें
सारांश
मुख्य बातें
गोरखपुर में मिशन शक्ति अभियान के तहत 14 अक्टूबर 2026 को एक अनूठी पहल देखने को मिली, जब 12वीं कक्षा की दो छात्राओं को एसएसपी कार्यालय में एक दिन के लिए अधिकारी की भूमिका सौंपी गई। नैन्सी तिवारी और घृति तिवारी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकर दर्जनों फरियादियों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों का निवारण भी किया। उत्तर प्रदेश सरकार के महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत यह पहल बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से की गई।
मुख्य घटनाक्रम
गोरखपुर के जंगल धूसड़ स्थित एकेडमिक ग्लोबल स्कॉलर स्कूल की छात्राएं नैन्सी तिवारी और घृति तिवारी ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दोनों छात्राओं ने एसएसपी डॉ. कौस्तुभ और एसपी नॉर्थ राजेश गुणावत के साथ मिलकर जनसुनवाई की। इस दौरान उन्होंने दर्जनों मामले सुने और फरियादियों की शिकायतों के निपटारे में सक्रिय सहभागिता निभाई।
मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य
मिशन शक्ति अभियान उत्तर प्रदेश सरकार का महिला सशक्तीकरण केंद्रित कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत बालिकाओं को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली से सीधे अवगत कराया जाता है। इस पहल का मूल लक्ष्य छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और प्रशासनिक तंत्र की समझ विकसित करना भी इस अभियान का अभिन्न अंग है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
एसपी नॉर्थ राजेश गुणावत ने कहा कि इस पहल से न केवल छात्राओं और युवाओं के भीतर आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे पुलिस की कार्यप्रणाली को भी करीब से समझ सकेंगी। उन्होंने जोड़ा कि इस तरह की पहल से बेहतर पुलिसिंग का सपना भी साकार होगा। गौरतलब है कि यह अभियान राज्य के अन्य जिलों में भी इसी भावना के साथ संचालित किया जा रहा है।
आम जनता और छात्राओं पर असर
इस अनुभव से नैन्सी तिवारी और घृति तिवारी को प्रशासनिक व्यवस्था को भीतर से समझने का दुर्लभ अवसर मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यावहारिक सहभागिता बालिकाओं को भविष्य में सरकारी सेवाओं की ओर प्रेरित कर सकती है। साथ ही, यह पहल समुदाय में पुलिस और आम नागरिक के बीच के अंतराल को पाटने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।
क्या होगा आगे
मिशन शक्ति अभियान के तहत इस तरह की पहलें उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी विस्तारित किए जाने की संभावना है। बालिकाओं को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जोड़ने का यह प्रयोग आने वाले समय में महिला नेतृत्व की एक नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।