क्या मिशन शक्ति ने यूपी में महिला सुरक्षा को सुशासन की नई पहचान दी?
सारांश
Key Takeaways
- मिशन शक्ति ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।
- पांच लाख से अधिक महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण मिला है।
- महिला सुरक्षा के लिए 1663 थानों में केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- महिलाओं की शिकायतों में 60 प्रतिशत की कमी आई है।
- यह पहल सामाजिक परिवर्तन का साधन बन गई है।
लखनऊ, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को नई दिशा और स्तर प्रदान करने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल ‘मिशन शक्ति’ अब केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए आत्मविश्वास और साहस का प्रतीक बन चुकी है। जिस उत्तर प्रदेश में कभी महिलाओं को घर से अकेले बाहर निकलने में खतरा और संकोच होता था, अब वहां महिलाओं की सुरक्षा एक प्रमुख पहचान बन गई है।
मिशन शक्ति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा में सक्षम बनाना है। इसके अंतर्गत राज्यभर में पांच लाख से अधिक महिलाओं को विशेष आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। यह प्रशिक्षण उन्हें इस प्रकार सक्षम बनाता है कि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में स्वयं की रक्षा कर सकें। महिलाओं के लिए स्थापित फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क आपातकालीन स्थितियों में सहायता का सबसे तेज माध्यम बन चुका है। हर जिले में मिशन शक्ति कमांडो टीमें तैनात की गई हैं, जो त्वरित कार्रवाई कर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
शहरों की सड़कों पर महिला सुरक्षा को सुनिश्चित करने में पिंक बूथ और एंटी रोमियो स्क्वाड का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और उत्पीड़न जैसी घटनाओं में अब भारी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित शिकायतों में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट प्रमाण है। यह पहल केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और सामाजिक आत्मविश्वास भी प्रदान करती है। घर से लेकर कार्यस्थल तक और विद्यालय से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण का निर्माण हुआ है।
घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के खिलाफ अब तेज कार्रवाई और सख्त दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। शिकायत दर्ज करने से लेकर सहायता प्रदान करने तक एक पारदर्शी और संवेदनशील प्रक्रिया विकसित की गई है। योगी सरकार का यह प्रयास महिलाओं को वह शक्ति और विश्वास दे रहा है कि सुरक्षा कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा का यह मजबूत मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश की महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ कह सकती हैं कि अब डर नहीं, अब अपनी सुरक्षा हम स्वयं सुनिश्चित कर सकते हैं। यही बदलाव मिशन शक्ति को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर सामाजिक परिवर्तन का जनआंदोलन बनाने में सक्षम हुआ है।
महिला सुरक्षा के लिए 1663 थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिला बीट अधिकारी सक्रिय हैं और त्वरित शिकायत निस्तारण किया गया है। पिंक बूथ और एंटी रोमियो स्क्वाड की नियमित गश्त से दिसंबर 2024 तक 1.4 करोड़ लोगों को चेतावनी दी गई और 32077 का चालान किया गया।
वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर महिला सुरक्षा बढ़ी है। 3972 असामाजिक तत्व गिरफ्तार किए गए और 3 लाख से अधिक लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर चेतावनी दी गई। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन और सुरक्षा में ठोस सुधार भी किया गया है।