गोविंदन का दावा: एलडीएफ विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करेगा
सारांश
Key Takeaways
- गोविंदन का एलडीएफ की जीत पर विश्वास
- कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार
- केंद्र सरकार की विदेश नीति पर आलोचना
- राजनीतिक माहौल में बदलाव की संभावना
तिरुवनंतपुरम, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हाल के चुनावी रुझान भले ही विपक्ष के पक्ष में दिखाई दे रहे हों, लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने शुक्रवार को यह विश्वास व्यक्त किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) भारी बहुमत के साथ पुनः सत्ता में आएगा।
यह आश्वासन सीपीआई-एम के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि एलडीएफ उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जैसे ही चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होगा, उम्मीदवारों के नामों की सूचना दी जाएगी।
हालांकि, यह दावे उस समय किए जा रहे हैं जब 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हर चुनाव में वाम मोर्चा, खासकर सीपीआई-एम ने बड़े दावे किए, लेकिन चुनावी माहौल अक्सर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के पक्ष में दिखाई दिया।
केरल की २० सीटों में से 2024 के लोकसभा चुनाव में एलडीएफ को केवल एक सीट पर जीत हासिल हुई थी। इसके बाद हुए उपचुनावों में भी एक सीट को छोड़कर सभी सीटों पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने जीत दर्ज की।
दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों से पहले भी वाम मोर्चे ने अपने दबदबे को बनाए रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन नतीजे में कांग्रेस नीत यूडीएफ ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसे पार्टी के नेताओं ने केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के इतिहास में सबसे अच्छा प्रदर्शन कहा।
इन सभी चुनौतियों के बावजूद, गोविंदन ने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव एलडीएफ के पक्ष में एक निर्णायक जनादेश लेकर आएगा।
उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना की, आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता को कमजोर कर रही है।
गोविंदन के अनुसार, यह नीति परिवर्तन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के समय में शुरू हुआ और अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार इसे और तेजी से लागू कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति अमेरिकी साम्राज्यवाद का विरोध करने की रही है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान में बदलाव शुरू हुआ, जिसके बाद भारत अमेरिका के करीब होता चला गया।
गोविंदन ने यह भी कहा कि उसी समय में इज़रायल के साथ कूटनीतिक संबंध बहाल किए गए और परमाणु समझौते के माध्यम से भारत ने अपनी आत्मनिर्भरता और संप्रभुता से समझौता कर लिया, जिससे वह अमेरिका का कनिष्ठ साझेदार बन गया।
उन्होंने कहा कि पहले भारत अमेरिकी साम्राज्यवाद की युद्ध नीतियों के खिलाफ गुटनिरपेक्ष रुख अपनाता था, लेकिन अब देश पूरी तरह अमेरिका के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है, जो एक खतरनाक स्थिति है।