ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत को आर्थिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर करेगा मजबूत: मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत
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सारांश
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट महज़ एक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना नहीं — यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रबिंदु है। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत के अनुसार, मलक्का जलडमरूमध्य के निकट यह द्वीप भारत को 'न डूबने वाले सैन्य अड्डे' की ताकत देता है — और चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी के बीच यह बढ़त अमूल्य है।
Key Takeaways
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत ने 1 मई 2026 को राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के सामरिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। ग्रेट निकोबार द्वीप , मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और भारत को मुख्य भूमि से 1,400–1,500 किलोमीटर आगे समुद्री पहुँच प्रदान करता है। दुनिया का 30 से 40 प्रतिशत व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है — रावत ने इसे होर्मुज जलडमरूमध्य जितना महत्वपूर्ण बताया। रावत के अनुसार, यह प्रोजेक्ट भारत की निगरानी क्षमता को मज़बूत करेगा और चीन की समुद्री मौजूदगी का संतुलन करने में सहायक होगा। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों पर रावत ने विकास और पर्यावरण दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलने की बात कही।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत ने 1 मई 2026 को देहरादून में राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के सामरिक और आर्थिक महत्व को विस्तार से रेखांकित किया। उनके अनुसार, यह परियोजना भारत को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में एक निर्णायक रणनीतिक बढ़त दिला सकती है। रावत ने ज़ोर देकर कहा कि इस प्रोजेक्ट को समझने के लिए सबसे पहले इसकी भौगोलिक स्थिति को समझना अनिवार्य है।
भौगोलिक स्थिति और सामरिक महत्व
रावत ने बताया,
Point of View
आलोचकों का कहना है कि पर्यावरणीय मंज़ूरियों की प्रक्रिया और आदिवासी समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पारदर्शिता अभी भी अपर्याप्त है। बिना जवाबदेही के ढाँचे के, यह परियोजना रणनीतिक लाभ और पारिस्थितिक नुकसान के बीच एक अनसुलझा समीकरण बनी रह सकती है।
NationPress
01/05/2026
Frequently Asked Questions
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है और यह कहाँ स्थित है?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत के सबसे दक्षिणी द्वीप — ग्रेट निकोबार — पर प्रस्तावित एक बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजना है, जो मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसमें एक ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक टाउनशिप और एक रक्षा-नागरिक दोहरे उपयोग वाली सुविधा शामिल है।
ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के लिए सामरिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी. एस. रावत के अनुसार, यह द्वीप भारत को मुख्य भूमि से 1,400–1,500 किलोमीटर आगे समुद्री पहुँच देता है और मलक्का जलडमरूमध्य — जहाँ से विश्व का 30 से 40 प्रतिशत व्यापार गुज़रता है — के निकट 'न डूबने वाले सैन्य अड्डे' की भूमिका निभा सकता है। यह चीन की हिंद महासागर में बढ़ती मौजूदगी के संतुलन में भी सहायक होगा।
राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर क्या सवाल उठाए हैं?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस परियोजना को लेकर सवाल उठाए हैं, जिन पर रावत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। रावत ने कहा कि विकास और पर्यावरण दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलना ज़रूरी है और पर्यावरणीय चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
मलक्का जलडमरूमध्य का वैश्विक व्यापार में क्या महत्व है?
रावत के अनुसार, दुनिया का लगभग 30 से 40 प्रतिशत व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है। उन्होंने इसे होर्मुज जलडमरूमध्य जितना महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इन समुद्री 'चोकपॉइंट्स' के निकट मज़बूत उपस्थिति किसी भी देश के लिए रणनीतिक बढ़त का बड़ा स्रोत होती है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की निगरानी क्षमता को कैसे बढ़ाएगा?
रावत के अनुसार, यह परियोजना भारत को समुद्री मार्गों पर होने वाली गतिविधियों को बेहतर तरीके से ट्रैक करने और ज़रूरत पड़ने पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएगी। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने यह साबित किया है कि संकरे समुद्री रास्तों का सामरिक उपयोग कितना निर्णायक हो सकता है।