क्या ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी को लेकर विरोधाभासी दावे सही हैं?
सारांश
Key Takeaways
- ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी का खतरा बढ़ रहा है।
- डेल्टा-1 सेक्टर में प्रशासन के बयानों में विरोधाभास है।
- स्वास्थ्य कैंप में कई लोग बीमार पाए गए हैं।
- दूषित पानी की समस्या कई सोसाइटियों में फैल चुकी है।
- स्थायी समाधान का अभाव चिंता का विषय है।
ग्रेटर नोएडा, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दूषित पेयजल की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप लेती दिख रही है। विशेषकर डेल्टा-1 सेक्टर के संबंध में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास नजर आ रहा है। एक ओर, अथॉरिटी का कहना है कि उनकी टीम जब डेल्टा-1 पहुंची तो वहां कोई भी बीमार व्यक्ति नहीं मिला। दूसरी ओर, जिलाधिकारी द्वारा जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि इसी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया है और कई लोग पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से पीड़ित पाए गए हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने डेल्टा-1, ग्रेटर नोएडा में निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी गौतम बुद्ध नगर डॉ. नरेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि चिकित्सा अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डाढा, दनकौर के माध्यम से यह शिविर लगाया गया। शिविर में डॉ. शिल्पी शुक्ला, फार्मासिस्ट वेद प्रकाश, स्टाफ नर्स कुसुम और वार्ड बॉय कृष्णा कुमार मौजूद रहे। इस दौरान कुल 23 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें से 7 मरीज उल्टी और दस्त से प्रभावित पाए गए, जिनका मौके पर ही उपचार किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एहतियात के तौर पर डेल्टा-1 क्षेत्र के 5 घरों से पेयजल के नमूने भी एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, जिला प्रशासन के अनुसार अस्पतालों में रोजाना 40 से अधिक बच्चे डायरिया, पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत के साथ पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा साफ तौर पर दर्शाता है कि दूषित पानी की समस्या केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में यह लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
पिछले एक वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 10 सोसाइटियों में दूषित पानी के कारण सैकड़ों लोग बीमार पड़ चुके हैं। जांच में कई सोसाइटियों के पानी में ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए थे, जो संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। एक सोसाइटी में तो हालात इतने खराब हो गए थे कि दूषित पानी की वजह से 150 से अधिक लोग बीमार हो गए थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अथॉरिटी की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, दूषित पानी को लेकर जारी यह विरोधाभासी बयान लोगों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा रहा है।