गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने PM मोदी से मुलाकात की, 'विकसित गुजरात – विकसित भारत' संकल्प पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। दोनों नेताओं के बीच राज्य के गरीब वर्ग, युवाओं, किसानों और महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने तथा नए अवसर सृजित करने पर केंद्रित चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इस मुलाकात की पुष्टि की।
मुलाकात की मुख्य बातें
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। पटेल के अनुसार, इस बैठक में राज्य के 'विकसित गुजरात – विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात 'सदैव ऊर्जा और उत्साह का नया संचार' लेकर आती है।
बैठक में राज्य के चार प्रमुख वर्गों — गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी शक्ति — के लिए नीतिगत पहलों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श हुआ। हालाँकि, चर्चा के विस्तृत एजेंडे का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया।
महाअष्टमी पर अंबाजी दर्शन
दिल्ली यात्रा से एक दिन पहले, रविवार 18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री पटेल ने गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर का दौरा किया। उन्होंने पारंपरिक पूजा-अर्चना और आरती में भाग लिया तथा राज्य की शांति, समृद्धि और निरंतर विकास के लिए माँ अम्बे का आशीर्वाद माँगा।
गौरतलब है कि अंबाजी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और नवरात्रि पर्व के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु देशभर से दर्शन के लिए आते हैं।
व्यवस्थाओं का जायजा
अंबाजी दौरे के दौरान सीएम पटेल ने जिला प्रशासन द्वारा की गई सुविधाओं और सुरक्षा प्रबंधों का निरीक्षण किया। इसमें तीर्थयात्रियों के लिए आवास, भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की समीक्षा शामिल थी। त्योहार के दौरान मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद के मद्देनज़र प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे।
आगे का परिप्रेक्ष्य
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब गुजरात सरकार केंद्र की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी लाने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच इस तरह की नियमित बैठकें राज्य-केंद्र समन्वय की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं। आने वाले महीनों में इस चर्चा के ठोस नीतिगत परिणाम सामने आने की संभावना है।