गुजरात पुलिस इनोवेशन चैलेंज 2026: एआई और सीसीटीवी से स्मार्ट पुलिसिंग की तैयारी, ₹51 लाख पुरस्कार राशि
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन के ज़रिए अपराध-नियंत्रण क्षमता बढ़ाने और पुलिसकर्मियों के कार्य-घंटे बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाने जा रही है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 13 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में आयोजित 'गुजरात पुलिस इनोवेशन चैलेंज 2026' के समापन समारोह में यह जानकारी दी। यह आयोजन अहमदाबाद के आई-हब में संपन्न दो दिवसीय सेंटिनल हैकाथॉन 2026 के अंतर्गत हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
इस प्रतियोगिता में देशभर से 3,100 से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए और 1,000 से ज्यादा नवाचारपूर्ण समाधान प्राप्त हुए। इनोवेटर्स, स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ और शोधकर्ताओं ने एआई तथा सीसीटीवी इंटीग्रेशन के माध्यम से सार्वजनिक सुरक्षा के लिए समाधान प्रस्तुत किए।
हैकाथॉन के दौरान प्रतिभागियों ने लाइव सीसीटीवी फीड के ज़रिए रियल-टाइम ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान प्रणाली, वाहन ट्रैकिंग और वॉचलिस्ट मिलान जैसी तकनीकें प्रदर्शित कीं। प्रतियोगिता के पहले चरण में विजेताओं और प्रोत्साहन पुरस्कार विजेताओं को ₹18 लाख की पुरस्कार राशि दी गई, जबकि पहले और दूसरे चरण को मिलाकर कुल ₹51 लाख की राशि निर्धारित है।
सरकार की प्रतिक्रिया
संघवी ने स्पष्ट किया, 'यह इनोवेशन चैलेंज सिर्फ आईटी या तकनीकी ढाँचा तैयार करने अथवा अपराधों का पता लगाने तक सीमित नहीं है। यह एक मानवीय पहल भी है, जिसका उद्देश्य एआई और आधुनिक सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन के माध्यम से गुजरात पुलिस के हजारों जवानों और अधिकारियों के काम के घंटों को बचाना है।'
गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जीएस मलिक ने कहा कि राज्य के सीसीटीवी नेटवर्क को एआई और वीडियो एनालिटिक्स के साथ जोड़ने से अपराधों की रोकथाम, संदिग्ध व्यक्तियों की त्वरित पहचान और रियल-टाइम अलर्ट जारी करने में मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं गृह विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के सीसीटीवी कैमरों को एक साझा मंच पर लाना है।
नई प्रणालियाँ लॉन्च
इस कार्यक्रम में 'प्रति रक्षा' और 'पथिक 2.0' नामक दो नई प्रणालियाँ लॉन्च की गईं। आयोजकों के अनुसार, 'प्रति रक्षा' देश की पहली यूआईडीएआई मान्यता प्राप्त सहमति-आधारित डिजिटल पहचान सत्यापन प्रणाली है, जबकि 'पथिक 2.0' का विकास अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने किया है।
इन प्रणालियों के माध्यम से होटलों, पेइंग गेस्ट आवासों, फैक्ट्रियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की पहचान रियल-टाइम क्यूआर कोड और चेहरे की पहचान तकनीक से सत्यापित की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया कागजरहित होगी और लोगों की निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा किया गया है।
आम जनता और इनोवेटर्स पर असर
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार 'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज' और आई-हब के ज़रिए युवा इनोवेटर्स, छात्रों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर रही है। गौरतलब है कि आई-हब अब तक 700 से अधिक स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन, कानूनी सहायता और वित्तीय सहयोग प्रदान कर चुका है।
संघवी ने यह भी संकेत दिया कि सीसीटीवी इंटीग्रेशन और एआई-आधारित समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप्स के लिए गुजरात सहित अन्य राज्यों में भी व्यावसायिक अवसर खुल सकते हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस विभाग ने अवधारणा से लेकर क्रियान्वयन तक इनोवेटर्स का सहयोग करने और उन्हें वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य स्मार्ट पुलिसिंग अवसंरचना को अपग्रेड करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं — गुजरात की यह पहल उस राष्ट्रव्यापी रुझान में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।