सूरत में ई-रक्षक हैकाथॉन ग्रैंड फिनाले: 31 टीमों के साइबर समाधान अब पुलिसिंग में होंगे लागू
सारांश
मुख्य बातें
सूरत में 10 अक्टूबर 2026 को ई-रक्षक हैकाथॉन का ग्रैंड फिनाले आयोजित हुआ, जिसमें गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भाग लिया। इस आयोजन में देशभर के 6 राज्यों की 13 से अधिक यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों की 31 टीमों के 150 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। उपमुख्यमंत्री संघवी ने स्पष्ट किया कि इन युवाओं द्वारा विकसित तकनीकी समाधानों का उपयोग आने वाले दिनों में एफआईआर दर्ज करने और साइबर अपराध सुलझाने की सरकारी प्रक्रिया में किया जाएगा।
हैकाथॉन का स्वरूप और उद्देश्य
इस हैकाथॉन का आयोजन सूरत सिटी पुलिस और सरदार वल्लभभाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एसवीएनआईटी) की नेक्सस यूनिट ने संयुक्त रूप से किया। पुलिस कमिश्नर वबांग जमीर ने बताया कि इस हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य कॉलेज छात्रों से डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध रोकने के लिए नवीन तकनीकी समाधान प्राप्त करना है।
डीसीपी (साइबर क्राइम) विशाखा जैन ने जानकारी दी कि पुलिस थानों में सीधे सर्वे करके आम नागरिकों की रोज़मर्रा की कठिनाइयों और पुलिस कार्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हैकाथॉन के लिए 9 से 10 प्रॉब्लम स्टेटमेंट तय किए गए। देशभर के कॉलेजों से कुल 458 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से चुनी गई 31 टीमों के 150 छात्र ग्रैंड फिनाले में पहुँचे।
उपमुख्यमंत्री की मुख्य घोषणाएँ
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि प्रौद्योगिकी जितनी उपयोगी है, उतनी ही चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियाँ अक्सर हार्डवेयर और कैमरा मॉडल बदलती रहती हैं जिससे सरकारी सिस्टम पर बोझ पड़ता है, इसलिए हैकाथॉन के माध्यम से सॉफ्टवेयर-आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है।
संघवी ने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कैमरा इंटीग्रेशन के ज़रिए ट्रैफिक सिग्नल पर प्रति व्यक्ति केवल 15 सेकेंड की बचत से लाखों लोगों का कीमती समय और ईंधन बचाया जा सकता है। उन्होंने अपना लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि वे पूरे गुजरात के सभी सीसीटीवी कैमरों को एक ही डैशबोर्ड से जोड़ना चाहते हैं।
युवाओं और स्टार्टअप के लिए सरकारी सहयोग
उपमुख्यमंत्री ने युवाओं से सोशल मीडिया और सामान्य चर्चाओं से आगे बढ़कर सरकारी योजनाओं का अध्ययन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने युवाओं के स्टार्टअप उद्यमों के लिए ऑफिस रेंट, वित्तीय सहायता और OPEX सपोर्ट के विशेष प्रावधान किए हैं।
इसके अंतर्गत राज्य सरकार की औद्योगिक एवं स्टार्टअप नीति, MSME और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी योजनाओं के तहत स्टार्टअप इंडिया सहायता, सीड फंड स्कीम, परिचालन खर्च, वेतन, मार्केटिंग, क्लाउड सब्सक्रिप्शन और विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए सहायता शामिल है। संघवी ने कहा कि सरकार युवाओं के विचारों को ज़मीन पर उतारने के लिए उनकी 'रिस्क पार्टनर' के रूप में खड़ी है।
साइबर क्राइम टीम की सराहना और आयोजन में उपस्थित अधिकारी
उपमुख्यमंत्री संघवी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर अपराध रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए सूरत साइबर क्राइम टीम की सराहना की। इस अवसर पर रेंज आईजी प्रेमवीर सिंह, जिला कलेक्टर तेजस परमार, म्युनिसिपल कमिश्नर राजकुमार बेनीवाल, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (सेक्टर-1) बलराम मीणा, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (अपराध) डॉ. करणराज वाघेला, महिसागर एसपी शफीन हसन, एसवीएनआईटी निदेशक प्रो. अनुपम शुक्ला सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में युवा छात्र मौजूद रहे।
यह आयोजन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देशभर में साइबर अपराध के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और पुलिस बल तकनीकी समाधानों की ओर रुख कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन युवा प्रतिभाओं के विकसित प्रोटोटाइप को वास्तविक पुलिसिंग प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।