भाजपा की हार की संभावना और पीओके मुद्दे पर गुलाम अहमद मीर की चिंता
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा की हार की संभावनाएँ
- पीओके मुद्दे पर बयानबाजी
- कांग्रेस की मजबूत स्थिति
- जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवस्था
- अंतरराष्ट्रीय तनाव का प्रभाव
जम्मू, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस विधायक गुलाम अहमद मीर ने पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों, पीओके के मुद्दे, जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पांच राज्यों में भाजपा की जीत की संभावना स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रही है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर चर्चा करते हुए, कांग्रेस विधायक ने कहा कि केरल में बदलाव की स्थिति बनती दिख रही है, लेकिन वहाँ भाजपा के लिए खाता खोलना मुश्किल होगा। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ सरकार की वापसी की संभावना जताते हुए उन्होंने कहा कि पुदुचेरी में कांग्रेस की स्थिति में सुधार हो रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल में त्रिकोणीय मुकाबला होने की बात कही, जिसमें ममता बनर्जी की टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस तीनों शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस का प्रयास है कि पार्टी की नीतियों को पूरे बंगाल में लोगों तक पहुंचाया जाए। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस मजबूत है, जबकि कई इलाकों में दशकों से पार्टी की स्थिति कमजोर रही है।
गठबंधन की राजनीति पर बात करते हुए, मीर ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस एक बड़ी पार्टी होने के नाते क्षेत्रीय दलों को जगह देती आई है, लेकिन कई राज्यों में क्षेत्रीय दल कांग्रेस को साथ लेने में इच्छुक नहीं होते। ऐसे में कांग्रेस को अपनी ताकत बढ़ाने का कोई विकल्प नहीं बचता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बिना इंडिया गठबंधन मजबूत नहीं हो सकता और पार्टी पूरे देश में अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कार्यरत है।
पीओके के मुद्दे पर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी के बयान का समर्थन करते हुए मीर ने कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है और इस पर संसद में भी चर्चा हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से इस मुद्दे पर केवल बयानबाजी कर रही है, जबकि पिछले वर्षों में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि जब अवसर मिले, तब भी सरकार ने दबाव में आकर कदम पीछे खींच लिए।
जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए मीर ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी सीधे गृह मंत्रालय के पास है, लेकिन इसके बावजूद हालात बेहतर होने के दावों के विपरीत कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। उन्होंने पहलगाम की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक वर्ष बीतने के बावजूद अब तक दोषियों की पहचान नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में लगातार घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार इन हालातों को छिपाने की कोशिश कर रही है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर देश के भीतर भी साफ नजर आ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई व्यवसायिक इकाइयां, फैक्ट्रियां और छोटे कारोबार प्रभावित हुए हैं। पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में बाधाएं आ रही हैं, खासकर कश्मीर में कृषि से जुड़े कार्य जैसे कीटनाशक छिड़काव तक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन द्वारा ईंधन वितरण पर लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र किया और कहा कि जमीनी स्थिति बहुत गंभीर है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए मीर ने कहा कि युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर दिख रहा है और इसका सीधा प्रभाव भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे यह युद्ध लंबा खिंचेगा, उसका असर भारत सहित अन्य देशों पर और अधिक गहरा होगा।