हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला क्यों सराहा गया?
सारांश
Key Takeaways
- हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का निर्णय
- संतों का मानना कि यह संस्कृति की रक्षा के लिए है
- शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार की निंदा
अयोध्या, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अयोध्या धाम के साधु-संतों और जगत गुरु ने हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्णय की सराहना की है।
साधु-संतों ने माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए दुर्व्यवहार पर अपनी बात रखी। संत-समाज का मानना है कि यह यूपी सरकार और सनातन धर्म को बदनाम करने की एक साजिश है।
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने कहा, "मौनी अमावस्या के दिन उनकी पालकी को रोका जाना गलत था, लेकिन कुछ लोग सरकार को बदनाम करने के लिए इस स्थिति का लाभ उठा रहे हैं। मैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से निवेदन करूंगा कि कुछ विधर्मी लोगों की पहचान की जाए। यह समय संयम से काम लेने का है, लेकिन मामले की जांच भी होनी चाहिए।"
उन्होंने हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के फैसले पर कहा, "यह निर्णय बहुत सराहनीय है, क्योंकि मां गंगा हमारी देवी हैं, और उस स्थल से गैर-हिंदुओं की आस्था नहीं जुड़ी है। सरकार ने यह फैसला देरी से लिया, लेकिन यह सही है।"
आर्य संत वेदांती के वरुण दास महाराज ने कहा, "शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जो हुआ, वह बहुत गलत था। हमें यह पहचानना चाहिए कि वे लोग कौन हैं जो साधु समाज को निशाना बना रहे हैं।"
वहीं, हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले पर उन्होंने कहा, "मुसलमान हर तरफ जिहाद फैला रहे हैं और ऐसे में मां गंगा की रक्षा करना हर हिंदू का कर्तव्य बनता है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।"
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा, "मौनी अमावस्या का दिन स्नान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आए थे। प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका था।"
जगत गुरु परमहंसाचार्य जी महाराज ने कहा, "जहां-जहां हिंदुओं का धार्मिक स्थल है, वहां गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगानी चाहिए।"