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क्या नाट्य कलाकार हरिमाधव मुखोपाध्याय और रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को पद्मश्री मिलना गौरव का पल है?

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क्या नाट्य कलाकार हरिमाधव मुखोपाध्याय और रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को पद्मश्री मिलना गौरव का पल है?

सारांश

नाट्य कलाकारों की इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना दिया है। हरिमाधव मुखोपाध्याय और रघुवीर खेडकर की कहानी न केवल कला के प्रति समर्पण की है, बल्कि यह उनकी मेहनत और संघर्ष का प्रतीक भी है। उनकी उपलब्धियों को जानने के लिए आगे पढ़ें।

मुख्य बातें

हरिमाधव मुखोपाध्याय को पद्मश्री पुरस्कार मिला।
रघुवीर खेडकर का भी सम्मान हुआ।
इस पुरस्कार के लिए कलाकारों ने भारत सरकार का धन्यवाद किया।
स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।
नाट्य कला के प्रति उनके योगदान को सराहा गया।

बालुरघाट/पंढरपुर, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बालुरघाट के प्रसिद्ध नाट्य व्यक्तित्व हरिमाधव मुखोपाध्याय को पद्मश्री पुरस्कार मिलने की घोषणा से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। महाराष्ट्र के रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को भी यह सम्मान प्राप्त हुआ है, जिसके लिए उन्होंने भारत सरकार का धन्यवाद किया है।

जब हरिमाधव मुखोपाध्याय को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुने जाने की सूचना मिली, तब बालुरघाट में उत्सव जैसा माहौल बन गया। वह न केवल बालुरघाट या उत्तर बंगाल के, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व भारत के रंगमंच जगत के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे।

उनके द्वारा निर्देशित नाटक ‘देवांशी’ सहित कई नाटकों को देशभर में सराहना मिली थी। पिछले वर्ष मार्च में उनका निधन हो गया था और इस वर्ष भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने का निर्णय लिया है। इस खबर से स्थानीय लोग बहुत भावुक हो गए हैं। उनके पुत्र कृष्णेंदु मुखोपाध्याय ने बताया कि आज मानव संसाधन विकास मंत्रालय से फोन कर उन्हें इस सम्मान की जानकारी दी गई। इस सम्मान से पूरा परिवार गर्वित और खुश है।

इसके अलावा, पंढरपुर के रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को भी पद्मश्री मिला है। उन्होंने कहा कि पद्मश्री अवॉर्ड मिलना उनकी खुशकिस्मती है और इसके लिए उन्होंने सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस मौके पर अपनी माँ कांताबाई सातारकर और पूरी तमाशा इंडस्ट्री को इस सम्मान का समर्पण किया।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने वर्ष २०२६ के पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की है, जिसमें रघुवीर खेडकर को तमाशा कला में उनके अमूल्य योगदान और संरक्षण के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अपनी माँ कांताबाई सातारकर की विरासत को आगे बढ़ाते हुए इस कला को ४ दशकों से जीवित रखा है और तमाशा को गांवों से लेकर राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल कला जगत में उनकी महत्ता को दर्शाता है बल्कि यह दर्शकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। यह पुरस्कार उनके समर्पण और मेहनत की पहचान है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरिमाधव मुखोपाध्याय को पद्मश्री क्यों मिला?
हरिमाधव मुखोपाध्याय को उनके नाट्य योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार मिला है।
रघुवीर खेडकर कौन हैं?
रघुवीर खेडकर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार हैं।
पद्मश्री पुरस्कार का महत्व क्या है?
पद्मश्री पुरस्कार भारत सरकार द्वारा कला, संस्कृति, और सामाजिक सेवा में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है।
ये पुरस्कार कब दिए जाते हैं?
पद्मश्री पुरस्कार हर वर्ष गणतंत्र दिवस पर दिए जाते हैं।
हरिमाधव मुखोपाध्याय का योगदान क्या था?
हरिमाधव मुखोपाध्याय ने कई नाटकों का निर्देशन किया और कला को समृद्ध किया।
राष्ट्र प्रेस
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